Wednesday, March 4, 2026

ऑपरेशन से लौटकर हथियार तक किए जाते हैं सैनिटाइज, छुट्‌टी से लौटने वाला कैंप नहीं आता, बाहर ही किया जाता है क्वारेंटाइन

knn24news/ पहली लहर में कोरोना से जूझने वाले अर्धसैनिक बलों के जवान इस बार महामारी से सुरक्षित हैं। अपनी पिछली गलतियों से सबक लेते हुए जवानों ने वैक्सीनेशन के साथ बचाव के ढेरों उपाय किए, ऑपरेशन से लाैटने वाले जवानों के हथियार तक सैनिटाइज किए जाते हैं।

नतीजा यह रहा कि बीएसएफ के जिस कैंप में पिछली बार 100 से ज्यादा जवान संक्रमित हुए थे वहां अब तक एक भी जवान पॉजिटिव नहीं हुआ है। पहली लहर में जिले में जितने कोरोना मरीज आए उनमें 75 प्रतिशत बीएसएफ तथा एसएसबी कैंप के ही जवान थे। लेकिन फोर्स ने बहुत जल्द सबक लिया यही कारण है कि इस बार जवान संक्रमण से बचे हैं। जो इक्का-दुक्का संक्रमित हो भी जाते हैं उनके लिए अलग से क्वारेंटाइन सेंटर भी कैंप के आसपास ही तैयार कर लिए गए हैं। समय पर वैक्सीनेशन भी कारण है

पहली लहर में 6129 जवान संक्रमित मिले थे

जिले में पिछले साल मई से लेकर दिसंबर तक यानी कोरोना की पहली लहर में 6129 कोरोना संक्रमित मिले थे। इनमें 75 प्रतिशत जवान बीएसएफ और एसएसबी के थे। कैंप में एक साथ रहने के कारण कोरोना फैल गया।

पिछली बार जहां 80 हुए थे संक्रमित इस बार केवल एक

एसएसबी कैंप केंवटी कन्हारगांव 33 बटालियन के सहायक कमांडेंट पीसी सामी ने बताया कन्हारगांव में क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। यहां जवानों को अलग-अलग कमरों में रखा जाता है। पौष्टिक भोजन काढ़ा दिया जा रहा है। 33वीं बटालियन में एकमात्र जवान संक्रमित है जबकि पिछले वर्ष यहां के 80 जवान संक्रमित हुए थे। बीएसएफ मुल्ला कैंप 82 बटालियन में पिछले वर्ष सौ से ज्यादा जवान संक्रमित हुए थे इस बार सभी जवान सुरक्षित हैं।

दूसरी लहर में कांकेर जिले की फोर्स कोरोना से सुरक्षित है, भास्कर ने कैंपों तक पहुंचकर इसकी वजह जानी तो ये कारण सामने आए

  1. वैक्सीनेशन कवच: यहां जनवरी में वैक्सीनेशन शुरू होने के तत्काल बाद फरवरी में दूसरे चरण में जवानों को वैक्सीन लगाना शुरू किया गया। 99 प्रतिशत जवान पहली डोज, 70 प्रतिशत जवान दूसरी डोज लगवा चुके हैं।
  2. क्वारेंटाइन अनिवार्य: छुट्टी से जो भी जवान कैंप लौटते हैं उनके लिए 14 दिनों का क्वारेंटाइन अनिवार्य किया गया है। कैंपों के आसपास ही क्वारेंटाइन सेंटर तैयार किए गए हैं जहां इन जवानों को रखा जाता है।
  3. सोशल डिस्टेंसिंग: पिछली गलती से सबक लेकर कैंप के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने कई बदलाव किए गए हैं। रसोई बनाने में सोशल डिस्टेंसिंग पालन। सब्जी तथा दाल आदि पकाने वाले चम्मचों की लंबाई बढ़ाई गई। नहाते समय दूरी बनाए रखने के प्रबंध। बैरक में सोने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के प्रबंध।
  4. व्यायाम के साथ योग अनिवार्य: सामान्यत: कैंपों में जवानों को व्यायाम ही कराया जाता था। कोरोना से निपटने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका देखते व्यायाम के साथ योग को अनिवार्य किया गया है।
  5. रेगुलर सैनिटाइजेशन: गश्त में जाने के दौरान जवानों को सैनिटाइजर दिए जाते हैं ताकि रेगुलर सैनिटाइज होते रहें। यही नहीं, गश्त से लौटने के बाद कैंपों में प्रवेश से पहले जवानों के अलावा उनके सामान तथा हथियारों को भी पूरी तरह सैनिटाइज किया जाता है।