Friday, September 25, 2026

कोरोना के बाद खतरे की नई घंटी:वैज्ञानिकों ने समुद्र में ढूंढे 5,500 नए वायरस; ये भविष्य में नई बीमारियों की वजह बन सकते हैं

जहां पूरी दुनिया पिछले दो साल से कोरोना वायरस से जूझ रही है, वहीं अब वैज्ञानिकों ने समुद्र में 5,500 नए वायरस खोज निकाले हैं। अमेरिका की ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का कहना है कि कोरोना की तरह ये भी RNA वायरस हैं। चिंता वाली बात ये है कि खोजे गए वायरस भारत के अरब सागर और हिंद महासागर के उत्तर पश्चिमी इलाकों में भी मौजूद हैं।

इस स्टडी को हाल ही में साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है। वायरस ढूंढने के लिए वैज्ञानिकों ने दुनिया के सभी समुद्रों के 121 इलाकों से पानी के 35 हजार सैंपल्स लिए। जांच में उन्हें लगभग 5,500 नए RNA वायरस का पता चला। ये 5 मौजूदा प्रजातियों और 5 नई प्रजातियों के थे।

रिसर्चर मैथ्यू सुलिवान का कहना है कि सैंपल्स के हिसाब से नए वायरस की संख्या काफी कम है। हो सकता है कि भविष्य में लाखों की संख्या में वायरस मिलें।

वैज्ञानिकों का कहना है कि ये रिसर्च खास RNA वायरस को लेकर हुई है क्योंकि DNA वायरस के मुकाबले वैज्ञानिकों ने इन पर स्टडी कम की है। सुलिवान के मुताबिक, आज हमें केवल उन्हीं RNA वायरस के बारे में पता है, जिन्होंने दुनिया को मौत के खतरे में डाला है। इनमें कोरोना, इंफ्लुएंजा और इबोला वायरस शामिल हैं। इसलिए भविष्य में नई बीमारियों से बचने के लिए हमें पहले से तैयार रहना जरूरी है।

रिसर्च में टाराविरिकोटा, पोमीविरिकोटा, पैराजेनोविरिकोटा, वामोविरिकोटा और आर्कटिविरिकोटा नाम की 5 नई वायरस प्रजातियां पाई गई हैं। इनमें से टाराविरिकोटा प्रजाति दुनिया के हर समुद्र में मिली है। वहीं आर्कटिविरिकोटा प्रजाति के वायरस आर्कटिक सागर में पाए गए।

सुलिवान के अनुसार इकोलॉजी के हिसाब से देखा जाए तो ये खोज बेहद जरूरी है। यह स्टडी समुद्री क्लाइमेट चेंज की जांच करने वाले तारा ओशियंस कंसोर्टियम नाम के ग्लोबल प्रोजेक्ट का हिस्सा है।