Wednesday, March 4, 2026

दुर्ग के मरोदा यार्ड में खड़े 50 आइसोलेशन कोच 11 महीने से बंद पड़े, इनके भीतर हैं 400 बेड लेकिन आज तक एक भी मरीज नहीं हुआ भर्ती

कोरोना का कहर जारी है। हालात यह है कि अस्पतालों में मरीज दाखिल करने के लिए बेड नहीं है। कोरोना पॉजिटिव मरीज बिस्तरों के इंतजार में अस्पतालों के सामने सड़क पर, वाहनों में लेटे हुए हैं, ऐसे में आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि कोरोना मरीजों के लिए बनाए गए 900 बेड खाली पड़े हुए हैं। इनमें आज तक एक मरीज भी भर्ती नहीं किया गया।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के मरोदा रेलवे यार्ड में पिछले करीब 11 महीनों से आइसोलेशन ट्रेन के डिब्बे खड़े-खड़े कबाड़ हो रहे हैं। रायपुर और बिलासपुर डिवीजन के अंतर्गत 105 डिब्बों को आइसोलेशन वार्ड में बदला गया था, जिसमें मरोदा यार्ड में 50 डिब्बों में 400 बेड बनाए गये थे। इनको बनाने में तकरीबन दो लाख रुपए प्रति कोच खर्च किए गए थे लेकिन अब तक इनमें एक भी कोरोना मरीज एडमिट नहीं किया गया है। दरअसल 400 बिस्तर तो हैं, लेकिन ना तो डाक्टर हैं ना पैरामेडिकल स्टाफ, लिहाजा ये कोच बेकार हो गए हैं। ऐसे और कोच बिलासपुर में भी खड़े हैं।

कोरोना काल में पिछले साल कोरोनावायरस के संक्रमण की लहर के चलते रेलवे प्रशासन ने ट्रेन के डिब्बों को आइसोलेशन वार्ड बनाया था। इसके बाद से इन डिब्बों को कभी खोला नहीं गया। डिब्बों की खिड़कियों में लगे प्लास्टिक फटने लगे हैं। महीनों से खड़े इन डिब्बों को देखने से यही लगता है कि आइसोलेशन डिब्बे तैयार करके रेलवे प्रशासन उन्हें भूल गया हैं।