Saturday, July 4, 2026

नकटी विस्थापितों का सीएम हाउस घेराव, 5 दिन का अल्टीमेटम; मुआवजा और जमीन लौटाने की मांग तेज

सीएम हाउस के सामने ही ग्रामीणों ने भोजन किया।रायपुर। नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित ग्रामीणों ने शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण सड़क पर ही बैठकर भोजन करने लगे। इस बीच पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने का प्रयास किया, जिस पर ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए कहा कि पहले उनके घर तोड़े गए और अब उन्हें सड़क पर बैठकर भोजन करने से भी रोका जा रहा है।

पांच दिन में कार्रवाई की मांग

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने अपनी प्रमुख मांगों में जमीन वापस दिलाने, ध्वस्त किए गए मकानों का उचित मुआवजा देने तथा आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग उठाई।

मामले को लेकर कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल की 10 महिलाओं को चर्चा के लिए बुलाया। ग्रामीणों ने अपनी मांगें अधिकारियों के सामने रखीं, जिस पर कलेक्टर ने उनकी बात शासन स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

कांग्रेस ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि पांच दिनों के भीतर ग्रामीणों की मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यपाल से मुलाकात की जाएगी। यदि वहां भी समाधान नहीं निकला तो पूरे छत्तीसगढ़ में बंद का आह्वान करने पर विचार किया जाएगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन को पांच दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि समय-सीमा के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

पहले मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का किया था घेराव

इससे पहले नकटी गांव के प्रभावित ग्रामीण मंत्री ओपी चौधरी के रायपुर स्थित बंगले का भी घेराव कर चुके हैं। बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवार अपने टूटे हुए मकानों के बीच बारिश और कीचड़ में धरने पर बैठे रहे थे। इसके अलावा ग्रामीण रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने भी प्रदर्शन कर चुके हैं और लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

85 मकानों पर हुई थी कार्रवाई

गौरतलब है कि तीन दिन पहले नकटी गांव में प्रशासन ने कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान 85 मकानों पर बुलडोजर चलाया था। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को ईडब्ल्यूएस (EWS) आवास उपलब्ध कराए गए हैं, हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि सभी प्रभावित परिवारों को आवास नहीं मिला है। वहीं, हाउसिंग बोर्ड का कहना है कि गांव के 77 लोगों ने करीब 15 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर रखा था, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।