Wednesday, August 19, 2026

मानिकपुर खदान विस्तार के विरोध में 8 गाँवों के ग्रामीण लामबंद, 500 से अधिक ग्रामीणों ने भिलाईखुर्द में लिया संकल्प — मांगें पूरी नहीं हुईं तो 21 अगस्त की जनसुनवाई का करेंगे पुरजोर विरोध

कोरबा। मानिकपुर ओपन कास्ट परियोजना के प्रस्तावित विस्तार को लेकर 21 अगस्त को होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई के विरोध में प्रभावित क्षेत्र के 8 गाँवों के ग्रामीण अब एकजुट हो गए हैं। भिलाईखुर्द क्रमांक-1 में आयोजित बैठक में 500 से अधिक ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक SECL प्रबंधन द्वारा उनकी जायज मांगों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक वे प्रस्तावित जनसुनवाई का पुरजोर विरोध करेंगे।


बैठक में ग्रामीणों ने खदान विस्तार परियोजना से प्रभावित परिवारों से जुड़े मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार, छूटे हुए मकानों एवं परिवारों को पात्रता में शामिल करने तथा अन्य लंबित अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों से उनकी समस्याएं लंबित हैं, ऐसे में पहले उनकी जायज मांगों का निराकरण किया जाना चाहिए और उसके बाद ही खदान विस्तार से संबंधित जनसुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।
ग्रामीणों के समर्थन में कोरबा जिले के विभिन्न क्षेत्रों—कुसमुंडा, गेवरा, दीपका, बालको, दर्री सहित अन्य क्षेत्रों से आए विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा पार्टी नेताओं ने भी बैठक में भाग लिया और ग्रामीणों की मांगों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभावित ग्रामीणों की समस्याएं कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने पूर्व में भी SECL के CMD तथा स्थानीय प्रबंधन को पत्र लिखकर स्पष्ट रूप से मांग की थी कि जनसुनवाई आयोजित करने से पहले ग्रामीणों की जायज मांगों और लंबित समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए।
उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। जिन लोगों की जमीन, मकान और जीवन-यापन खनन परियोजना से प्रभावित हो रहा है, उनकी उचित भरपाई, पुनर्वास और रोजगार सहित सभी जायज अधिकार सुनिश्चित करना SECL प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
श्री अग्रवाल ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि “मैं हमेशा ग्रामीणों के साथ खड़ा हूं और उनकी जायज मांगों की लड़ाई में हर संभव सहयोग करूंगा। यदि SECL प्रबंधन ग्रामीणों की मांगों को न्यायपूर्ण तरीके से पूरा करता है, तो मैं स्वयं जनसुनवाई का समर्थन करूंगा। लेकिन यदि मांगों की अनदेखी करते हुए जनसुनवाई कराने का प्रयास किया गया, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर इसका लोकतांत्रिक एवं पुरजोर विरोध किया जाएगा।”
बैठक में मौजूद 500 से अधिक ग्रामीणों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और अन्य लंबित जायज मांगों के समाधान के बिना 21 अगस्त की प्रस्तावित जनसुनवाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध विकास के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण पुनर्वास, उचित मुआवजा और अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए है।
बैठक के बाद यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि पहले ग्रामीणों के अधिकारों का समाधान, उसके बाद ही खदान विस्तार की जनसुनवाई।
बैठक में कांग्रेस जिला अध्यक्ष शहर मुकेश कुमार राठौर, प्रदेश कांग्रेस सचिव विकास सिंह, युवा कांग्रेस अध्यक्ष राकेश पंकज, ब्लाक अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी, पालूराम साहू, माडल अध्यक्ष बसंत चन्द्रा, सुरती कुलदीप, भू-विस्थापित संघ के संरक्षक अमन पटेल, सुरेश पटेल, समय लाल, जीतेन्द्र राव धाकडे,किशन यादव, मोतीराम यादव, अरुण यादव, दिलीप उरांव, शिवलाल उरांव , राम्मेलाल धीवर, कलीराम, जीतराम उरांव, राजकुमार उरांव, मनोज पटेल, आलोक पटेल, उदय पटेल, साधराम पटेल, शिव प्रसाद पटेल, धनसिंह पटेल, रामकुमार पटेल, शिव पटेल, रामचरण पटेल, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.