गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ में ट्रेनों की लेटलतीफी का दौर बदस्तूर जारी है. रेल यात्रियों के लिए रेल का सफर किसी युद्ध लड़ने जैसा हो गया है, जिसमें समय की कोई कीमत ही नहीं है. बिलासपुर से पेंड्रारोड का सफर जिसे बड़ी आसानी से 2 घंटों में पूरा किया जाता था, उसे आज पूरा करने में 8 घंटे लग जा रहे हैं.
रेलवे का यात्रियों के प्रति असंवेदनशीलता और मनमाना रवैया ने लोगों को हलाकान कर दिया है. ट्रेनों की बिगड़ी चाल और जंबो मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने के कारण 2 घंटे की इस दूरी को तय करने के लिए 8 घंटे लग रहे हैं.
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे अंतर्गत बिलासपुर कटनी रेल खंड की अधिकांश ट्रेनें आधुनिकीकरण और मरम्मत के कारण निरस्त थी. लगभग 15 दिनों के अंतराल के बाद तमाम ट्रेनें पटरी पर लौटी. आलम ये ही कि बिलासपुर से चलने वाली ट्रेन जो बड़ी आसानी से पेंड्रारोड तक 100 किलोमीटर का सफर बड़ी आसानी से 2 घंटे में पूरा कर लेती है. इस दूरी को तय करने में 6 से 8 घंटे लग रहे हैं.
सफर कर रहे यात्रियों ने बताया कि एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों को छोटे स्टेशन में घंटों रोककर जंबो मालगाड़ियों को पहले निकाला जा रहा है. यात्री हलाकान होते रहते हैं. बिना कुछ खाए पीये कुछ ट्रेनों के शौचालय में पानी तक की व्यवस्था नहीं होती है, लेकिन मालगाड़ियों को समय पर पहुंचाने के लिए रेलवे यात्रियों के साथ डबल गेम खेल रहा है.
कौन सी गाड़ी कितनी लेट ?
जानकारी के लिए बता दें कि बीते दिनों पेंड्रारोड स्टेशन में बिलासपुर-इंदौर एक्सप्रेस 4 घंटे, दुर्ग निजामुद्दीन हमसफर एक्सप्रेस 2 घंटे, रायपुर लखनऊ एक्सप्रेस 2 घंटे से अधिक, उत्कल एक्सप्रेस 6 घंटे, विशाखपट्नम-अमृतसर एक्सप्रेस 6 घंटे, दुर्ग भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस 7 घंटे से अधिक, वलसाड़ पुरी एक्सप्रेस 2 घंटे, कटनी बिलासपुर पैसेंजर 6 घंटे विलंब देरी से पहुंची. वहीं आधी रात के बाद की ट्रेनें भी घंटों विलंब से चल रही हैं.
बताया जा रहा है अधिक से अधिक कोयला परिवहन करने के कारण 2-2 मालगाड़ियों को जोड़कर एक साथ चलाया जा रहा है, जिसकी वजह से यात्री ट्रेनों को कहीं भी रोक कर इन लंबी मालगाड़ियों को निकाला जा रहा है. रेलवे के अधिकारी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दे पा रहे हैं.











