धनरास एवं नवागांव क्षेत्रों में बने राखड़ डैम में पावर प्लांट्स की राख डंप की जाती है, लेकिन हाल ही में इन डैमों की ऊंचाई बढ़ाने (राइजिंग) का काम जारी है, जिससे बड़ी मात्रा में राख उड़कर आसपास के गांवों और शहर में फैल रही है। नवागांव, धनरास, झाबु, चारपारा, स्याहीमुड़ी, सीएसईबी कॉलोनी, दर्री सहित कोरबा शहर के अनेक हिस्से इससे प्रभावित हुए हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि राख से उनकी आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और घरों के अंदर तक राख की परतें जम गई हैं। बावजूद इसके न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोई सख्त कदम उठाया है और न ही पावर प्लांट प्रबंधन की ओर से कोई राहत दी गई है।
स्थानीय नागरिकों का आक्रोश
नवागांव निवासी रमेश साहू ने बताया, “हर साल गर्मी में यही होता है, लेकिन इस बार हद पार हो गई है। सुबह से ही राख की वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा पाए और बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ रही है।”
प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
पिछले कई वर्षों से कोरबा को ‘ऊर्जा की राजधानी’ के साथ-साथ ‘राख की राजधानी’ भी कहा जाने लगा है। प्रशासन और प्लांट प्रबंधन की लापरवाही की वजह से हर साल गर्मी और आंधी में राख उड़ती है, पर कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि फ्लाई ऐश डैम को ढंकने के लिए उचित व्यवस्था की जाए, राइजिंग कार्य को रोककर वैज्ञानिक तरीके से राख का प्रबंधन किया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।