Monday, September 21, 2026

मेडिकल कॉलेज अस्पताल का हाल:इमरजेंसी वार्ड के सामने फर्श पर परिजन के सोने और खाने से संक्रमण का खतरा

चमचमाती हुई फर्श पर बाेरिया-बिस्तर लेकर बैठे या साेते हुए लाेग, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे…यह नजारा किसी रेलवे स्टेशन का नहीं बल्कि मेडिकल काॅलेज संबद्ध अस्पताल (जिला अस्पताल) का है। दरअसल यहां इमरजेंसी वार्ड में कुछ महीने पहले आईसीयू और बर्न यूनिट शुरू हुए।

अब घटना-दुर्घटना या बीमारी के इमरजेंसी केस में लाेग मरीज काे निजी अस्पताल ले जाने के बजाय मेडिकल काॅलेज अस्पताल लेकर आ रहे हैं। इसलिए इमरजेंसी वार्ड में मरीजाें की संख्या बढ़ गई है। अधिकांश मरीजाें के साथ उनके परिवार के कई लाेग पहुंच रहे हैं।

इमरजेंसी केस के मरीजाें के अटेंडर या परिजन के लिए अस्पताल में वेटिंग हाॅल नहीं बना है। इसलिए वे आईसीयू व बर्न वार्ड के आसपास फर्श पर ही डेरा डाल देते हैं। बैठने व साेने के अलावा वहां पर ही खाना भी खाते हैं। साथ में बच्चे भी हाेते हैं। जबकि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के आसपास संक्रमण का खतरा बना रहता है। कोई रोक टोक करने वाला भी होता।

परिसर में रैन बसेरा, पसरा रहता है सन्नाटा
अस्पताल परिसर में 10 बेड का रैन बसेरा मौजूद है। जिसका संचालन नगर निगम द्वारा किया जाता है। लेकिन इसकी जानकारी के लिए किसी तरह का फ्लैक्स या सूचना अस्पताल में नहीं लगाया गया है। जिस कारण मरीजों के परिजन काे पता भी नहीं चलता। इसके अलावा इमरजेंसी वार्ड से ज्यादा दूर हाेने के कारण जानकारी हाेने पर परिजन वहां जाने के बजाय अस्पताल के अंदर ही ठहर जाते हैं। इसलिए रैन बसेेरा में सन्नाटा पसरा रहता है। अस्पताल प्रबंधन काे ऐसे में इमरजेंसी वार्ड के पास खाली जगह पर वेटिंग हाॅल बनाने का इंतजाम करना चाहिए।

मरीज की देखरेख के लिए अटेंडेंट जरूरी है
मेडिकल काॅलेज अस्पताल के असिस्टेंट मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डाॅ. रविकांत जाटवर के मुताबिक अस्पताल के वार्डाे में भर्ती मरीजाें की देखरेख के लिए अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहते हैं। एक अटेंडर रहना जरूरी हाेता है। इसलिए अस्पतालों में अटेंडर काे वार्ड के आसपास रहने की छूट रहती है। अन्य सदस्यों काे वार्डाे के बजाय दूसरीे जगह रहना चाहिए। संक्रमण का खतरा रहता है।

ज्यादा लोगों से होती है दिक्कत: डाॅ. कंवर
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर गोपाल कंवर के मुताबिक इमरजेंसी वार्ड के आईसीयू व बर्न यूनिट में भर्ती मरीजों के साथ आने वाले 1-1 अटेंडर के हिसाब से वेटिंग एरिया है, लेकिन एक मरीज के पीछे 3 से 4 लोगों के आने की वजह से दिक्कत सामने आ रही है। संक्रमण की आशँका बनी रहती है। अलग से लोगों के रुकने के लिए आगे वेटिंग हॉल की व्यवस्था की जाएगी।