
कोरबा . कोयला श्रमिकों का 11 वेतन समझौता विगत वर्ष 01.07.2021 से लंबित है, जिसमें कोल इंडिया प्रबंधन और श्रम संगठनों की 5 बैठकों के पश्चात भी कुछ नतीजा नहीं निकला हैं ? निःसंदेह वेतन समझौते में जितनी अधिक देरी होगी कोल इंडिया पर बकाया राशि के भुगतान का उतना ही अधिक वित्तिय भार बढ़ेगा।
इन 5 बैठको में श्रम संगठनों कि अनुचित मांग और कोल इंडिया प्रबंधन की हास्यास्पद प्रस्तुति लगभग 2 लाख 50 हजार श्रमिकों के जी तोड़ परिश्रम का उपहास कर रहें हैं ? जिन बैठको में कोयला श्रमिकों का भविष्य निर्धारण होना हैं उस पर गंभीर चर्चा का न होना बहुत चिंताजनक हैं। पिछले दस वेतन समझौते में नहीं हुआ वैसी 50 प्रतिशत न्युनतम वेतन लाभ (एम.जी.बी) की मांग श्रम संगठन कर रहें हैं और प्रबंधन 3 प्रतिशत देंगे बोल रहे हैं ? पता नहीं किस गणित के सूत्र से चल रहें हैं ? आज तक 24 प्रतिशत से अधिक कभी भी न्युनतम वेतन लाभ नही मिला हैं कोयला श्रमिको को ? और रहा सवाल कोल इंडिया के वित्तिय स्थिति का वह बहुत बेहतर हैं वर्तमान में परन्तु भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन अपने चरम पर हैं कोल इंडिया में जिसके सैंकड़ो उदाहरण हैं










