₹144 करोड़ का लक्ष्य और 45% की सुस्त रफ्तार
कोरबा नगर निगम ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए लगभग ₹144 करोड़ के राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जनवरी के मध्य तक केवल 45 प्रतिशत राशि ही सरकारी खजाने में आ पाई है। इस सुस्त रफ्तार ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। राजस्व की इसी कमी को दूर करने के लिए आयुक्त ने सबसे पहले निगम के सहयोगी ठेकेदारों और बड़े बकायेदारों को निशाने पर लिया है।
राजनीतिक संरक्षण बनाम प्रशासनिक कार्रवाई
नगर निगम के गलियारों में चर्चा है कि कई रसूखदार ठेकेदार राजनीतिक रसूख की आड़ में लंबे समय से टैक्स अदायगी से बचते रहे हैं। हालांकि, आयुक्त के इस ‘ब्लैकलिस्ट’ वाले अल्टीमेटम ने ऐसे लोगों की नींद उड़ा दी है। ठेकेदारों को साफ संदेश दिया गया है कि यदि उन्हें भविष्य में निगम के टेंडर प्रक्रियाओं में हिस्सा लेना है, तो पहले अपने बकाया कर का भुगतान करना होगा।
अगला कदम: डोर-टू-डोर सर्वे और कुर्की की तैयारी
राजस्व अमले को निर्देशित किया गया है कि वे वार्ड स्तर पर शिविर लगाकर वसूली में तेजी लाएं। जो बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान बार-बार नोटिस के बाद भी टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं, उनकी संपत्ति कुर्की करने की भी तैयारी चल रही है। आने वाले दिनों में निगम की यह सख्ती और बढ़ने के आसार हैं।
विश्लेषण: मार्च क्लोजिंग से पहले निगमों द्वारा ऐसी सख्ती सामान्य है, लेकिन ठेकेदारों को सीधे ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी कोरबा में एक कड़ा प्रशासनिक संदेश है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह कदम केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है या वास्तव में डिफॉल्टर्स पर गाज गिरती है।



कोरबा — नगर पालिक निगम कोरबा में राजस्व वसूली को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले बकाया टैक्स वसूलने के लिए कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। आयुक्त ने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी है कि निगम के साथ काम करने वाले जो ठेकेदार स्वयं का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया रखेंगे, उन्हें तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।



