कोरबा। एसईसीएल की गेवरा-दीपका परियोजना से प्रभावित ग्राम मलगांव की जमीनों के मुआवजा घोटाले में एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसी ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। Central Bureau of Investigation (CBI) की टीम ने कोरबा पहुंचकर गहन जांच शुरू कर दी है, जिससे पूरे कोयलांचल क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सीबीआई की टीम में शामिल एक डीएसपी सहित कई अधिकारी पिछले तीन दिनों से गेवरा हाउस में डेरा डाले हुए हैं और दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ संबंधित लोगों से पूछताछ कर रहे हैं।
करोड़ों के फर्जी मुआवजा का मामला
इस मामले में पहले भी सीबीआई ने श्रमिक नेता श्यामू जायसवाल के खिलाफ करोड़ों रुपए के फर्जी मुआवजा जारी कराने के आरोप में अपराध दर्ज किया था। हालांकि, उसके बाद कार्रवाई धीमी पड़ गई थी, लेकिन अब एक बार फिर जांच में तेजी आई है।
152 ग्रामीणों को किया गया तलब
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने उन 152 ग्रामीणों को विशेष रूप से बुलाया है, जिनके नाम मुआवजा सूची में होने के बावजूद उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया था। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि वे वास्तविक हकदार हैं, लेकिन कुछ जमीन दलालों और अधिकारियों की मिलीभगत से उन्हें मुआवजा से वंचित कर दिया गया।
बाबू परिवार पर भी संदेह
मामले में प्रशासनिक कर्मचारी मनोज गोभिल के परिवार की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि उनके नाम पर पांच अलग-अलग फर्जी मुआवजा पत्रक तैयार किए गए थे, जिनमें अधिकारियों के हस्ताक्षर और सील भी दर्ज थे। मामला सामने आने के बाद इन दस्तावेजों को निरस्त कर दिया गया था, लेकिन यदि समय रहते खुलासा नहीं होता तो करोड़ों की हेराफेरी संभव थी।
अधिकारियों और ग्रामीणों के बयान दर्ज
सीबीआई की टीम मुआवजा पत्रक तैयार करने वाले कर्मचारियों से लेकर तत्कालीन राजस्व अधिकारी, एसईसीएल के अधिकारी, तहसीलदार, ग्राम कोटवार और भूविस्थापितों के बयान दर्ज कर रही है। जो लोग उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं, उन्हें नोटिस जारी कर बुलाया जा रहा है।









