Thursday, March 12, 2026

कोरबा DMF घोटाला मामला: हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच तेज, कलेक्ट्रेट में दर्ज हुए ग्रामीणों के बयान

कोरबा (छत्तीसगढ़)। कोरबा जिले के जिला खनिज न्यास मद (DMF) में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिका के बाद जांच प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। बिलासपुर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद गठित तीन सदस्यीय जांच समिति के समक्ष सोमवार को कोरबा कलेक्ट्रेट में दर्जनों ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और याचिकाकर्ताओं ने पेश होकर DMF फंड के दुरुपयोग को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।

हाईकोर्ट में लक्ष्मी चौहान एवं अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोयला खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास तथा भू-विस्थापितों के कल्याण के लिए बनाए गए DMF फंड का नियमों के विपरीत उपयोग किया गया। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था, जिसने कोरबा कलेक्ट्रेट में सुनवाई कर संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए।

याचिकाकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप

मुख्य याचिकाकर्ता लक्ष्मी चौहान, सपुरन कुलदीप और अजय श्रीवास्तव ने समिति के समक्ष बताया कि किस प्रकार खनन प्रभावित ग्रामीणों और भू-विस्थापितों के अधिकारों की अनदेखी करते हुए DMF की राशि का कथित तौर पर बंदरबांट किया गया। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं का लाभ सीधे प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए था, वे कागजों तक सीमित रह गईं।

जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने रखी शिकायतें

सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। इनमें जनपद सदस्य बसंत कुमार कंवर (कटघोरा) और अनिल टंडन (पाली) प्रमुख रहे। इसके अलावा ग्राम सरपंच गौरी बाई (बेलटिकरी), विष्णु बिंझवार (रलिया) और लोकेश कंवर (हरदीबाजार) ने भी DMF फंड के दुरुपयोग को लेकर अपनी बात रखी।

भू-विस्थापित कामगार सहकारी समिति की प्रतिनिधि अनुसुइया राठौर, ग्रामीण प्रतिनिधि रुद्र दास महंत (नराई बोध), सतीश कुमार (भैरोताल) और देवेंद्र कुमार (पुनर्वास ग्राम गंगानगर) सहित अन्य ग्रामीणों ने भी समिति के सामने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

जांच समिति द्वारा दर्ज किए गए बयानों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे हाईकोर्ट में पेश किया जाना है। अब सभी की निगाहें समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि DMF फंड में हुई कथित अनियमितताओं की सच्चाई क्या है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी।