Monday, March 16, 2026

कोरोना से डरे नहीं, डटे रहें आखिर कैसे…

हमें कोरोना के साथ ही जीना होगा, लेकिन बचाव के साथ। यह ठीक उसी तरह है जैसे पोलियो और फ्लू के वायरस के साथ हम न चाहते हुए भी रह रहे हैं, लेकिन हमने इन पर काफी हद तक काबू पा लिया है। पिछले सवा साल में जब से कोरोना वायरस ने लोगों की नींद उड़ाई है, तब से इसके हजारों म्यूटेशन हो चुके हैं। ऐसे में कुछ सवाल लाजमी हैं कि कोरोना का नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है? क्या नए स्ट्रेन से घबराना नहीं है?  ऐसे तमाम सवालों के जवाब एक्सपर्ट्स से बात करके दे रहे हैं नीरव अर सी।

दोबारा क्यों बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले

यह तेजी इस वजह से है कि हम पिछले दिनों काफी लापरवाह हो गए थे। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की बात काफी हद तक भूल गए थे। कोरोना के मामलों में आई तेजी के बाद सरकार इस बात पर खास तौर पर ध्यान रख रही है कि पहले के मुकाबले नए लक्षण तो नहीं उभर रहे। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि कोरोना के नए मामलों में नए स्ट्रेन की भूमिका है।

क्या करेंगे तो नहीं होगा कोरोना…

इस बात को गांठ बांध लें कि मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों को साफ करने की आदत भूलनी नहीं है। इसे हम ‘न्यू नॉर्मल’ कह सकते हैं। जिस तरह बाइक या स्कूटी से कहीं आते-जाते समय हमारे लिए हेलमेट पहनना जरूरी है, उसी तरह मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग भी जरूरी है। इनके बिना ज़िंदगी का सफर अधूरा और खतरे से भरा है।

कोरोना से बचाने में मास्क से ज्यादा कारगर कुछ नहीं है। इसे अपने लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लेना ही बेहतर है। मास्क पलूशन से भी बचाता है। मास्क पहनने के बाद भी 6 फुट की दूरी को न भूलें।

  1. कोई भी मास्क खरीदें तो इस बात का ध्यान जरूर रखें कि वह कम से कम 3 लेयर वाला हो। इससे ज्यादा लेयर वाला मास्क मिले तो और अच्छा होगा।
  2. मास्क से मुंह और नाक अच्छी तरह से कवर करे। उसे बार-बार एडजस्ट करने की जरूरत न हो।
  3. 2 साल से बड़े सभी बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों को घर से बाहर जाते हुए मास्क पहनना चाहिए।
  4. अगर कोई बीमार है और वह दूसरे लोगों के करीब है तो मास्क लगाएं। अगर वह घर पर हो, तब भी मास्क पहनें।
  5. किसी मरीज की देखभाल करने वाले को भी घर में मास्क जरूर पहनना चाहिए।
  6. अगर कोरोना के लक्षण हैं लेकिन रिपोर्ट नहीं आई है, तब घर में भी मास्क पहनें।मास्क से नाक, मुंह और ठुड्डी सही ढंग से ढकी होनी चाहिए।
  7. मास्क ढीला नहीं होना चाहिए यानी मास्क और चेहरे के बीच में जगह न हो। सांस लेते समय हवा मास्क से गुजरनी चाहिए, साइड से नहीं। ऐसा मास्क नहीं पहनना चाहिए जिससे सांस लेने में दिक्कत हो।
  8. मास्क उतारने के बाद 20 सेकंड तक साबुन से हाथ साफ करें। अगर मास्क दोबारा इस्तेमाल करना है तो उसे 2 से 3 घंटे के लिए धूप में छोड़ दें।

काढ़ा पीते रहें, हर दिन 20ml से ज्यादा नहीं

पानी: 60 से 70 एमएल (1 कप), दूध: 60 से 70 एमएल (1 कप), तुलसी के पत्ते: 3, लौंग: 1, काली मिर्च: 1 दालचीनी: एक चुटकी पाउडर चीनी या शक्कर: स्वाद के अनुसार, अगर डायबीटीज है तो न लें या वैद्य की सलाह से लें।

  • अगर लौंग, दालचीनी और काली मिर्च ले रहे हैं तो मुलेठी न लें या बहुत कम कर दें। इन तीनों की जगह मुलेठी लेना चाहते हैं तो एक बार किसी वैद्य से जरूर बात कर लें। गर्मी में काढ़ा दिनभर में 20 एमएल से ज्यादा न लें। काढ़ा हर शख्स की परेशानी और उसकी जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए।

नोट: -जिन्हें काढ़ा पचाने में परेशानी है, वे दूध और पानी में सिर्फ तुलसी का इस्तेमाल कर सकते हैं। वैद्य से भी बात कर लें।

डाइट में विटामिन- C, B और जिंक वाली चीजें

कौन-सा फल लें: 1 बड़ा अमरूद (200 ग्राम) या 2-3 संतरे या मौसमी (300 ग्राम) या 4 टमाटर (250 ग्राम)। इन्हें हर दिन खा सकते हैं। इनसे विटामिन-सी मिल जाएगा। इनके अलावा हमारे भोजन में साग-सब्जी या फल 4 अलग-अलग रंगों के हों तो शरीर की जरूरी मिनरल या विटामिन की जरूरत पूरी हो जाती है। जैसे- लाल: टमाटर, हरा: अमरूद, मौसमी पालक, लौकी आदि, पीला: पपीता, संतरा आदि। जिंक के लिए: नट्स (3 से 4 बादाम या 1 मुट्ठी रोस्टेड मूंगफली या 1 अखरोट)।

आओ धूप ले हम…

रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अगर शरीर में विटामिन-डी कम हो तो कई बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। सीधे शब्दों में कहें तो विटामिन-डी की उपयोगिता हमारे सिर के बाल से लेकर पैर के नाखून तक में है। इसकी बड़ी वजह यह है कि विटामिन-डी हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं में पाया जाता है। यह न सिर्फ विटामिन है बल्कि न्यूट्रिएंट भी है।

सभी जानते हैं कि विटामिन-डी हमें धूप से भरपूर मात्रा में मिलता है। यह अकेला विटामिन है जो हमें बिना खाए कुदरती तरीके से मिल जाता है। कुदरत ने हमारे लिए इसे ठीक वैसे ही मुहैया करवाया है, जैसे- हवा, पानी आदि। कोरोना के साथ विटामिन-डी के संबंधों पर कई तरह की रिसर्च हो रही हैं और कुछ का नतीजा यह है कि इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार होने की वजह से विटामिन-डी कोरोना से लड़ता है।

ऐसे लें धूप

  1. गर्मियों में सुबह 8 से 10 के बीच धूप में बैठें। सर्दियों में सुबह 9 से 12 बजे के बीच।
  2. सामान्य आदमी को हर दिन 30 से 35 मिनट धूप में जरूर बैठना चाहिए।
  3. अगर रोज संभव न हो तो सप्ताह में 3 दिन या एक-एक दिन छोड़कर भी धूप में बैठकर विटामिन-डी ले सकते हैं या एक सप्ताह में एक दिन भी 2 से 3 घंटे भी धूप में बैठ जाएं तो शरीर की एक सप्ताह की जरूरत लगभग पूरी हो जाएगी।
  4. चेहरे, गर्दन, पीठ, हाथ आदि पर धूप लगने दें। अगर किसी को धूप से एलर्जी है तो वह लगातार धूप में न बैठे। बीच-बीच में 15 मिनट बाद 5 या 10 मिनट का ब्रेक ले लें।
  5. धूप से चेहरा काला पड़ने की टेंशन है तो घुटने से नीचे के भाग को ही धूप में रखें।
  6. गोरी त्वचा वालों की तुलना में सांवली त्वचा वालों को 10 से 15 मिनट धूप में ज्यादा बैठना चाहिए।
  7. अगर बुजुर्ग हैं तो 35 से 40 मिनट रोज बैठें।

होम आइसोलेशन का ऐसा हो बंदोबस्त

  1. मरीज को होम या सेल्फ आइसोलेशन के दौरान हर समय तीन लेयर वाला मास्क पहने रहना चाहिए। हर 12 घंटे में इस मास्क को बदल दें। अगर लगता है कि पसीने की वजह से मास्क गीला हो गया है या धूप-मिट्टी से गंदा हो गया है तो उसे तुरंत बदल लें।
  2. मास्क को 1 प्रतिशत सोडियम हाइपोक्लोराइड के साथ डिसइंफेक्ट करने के बाद ही कूड़ेदान में फेंका जाना चाहिए।
  3. आइसोलेशन के दौरान मरीज को सिर्फ एक तय कमरे में ही रहना चाहिए। साथ ही परिवार के सभी लोगों से दूर रहना चाहिए। खासतौर पर बुजुर्गों, हाइपरटेंशन के मरीजों, जिन्हें हार्ट की समस्या हो या जिन्हें गुर्दे की बीमारी हो, उनसे दूरी जरूरी है।
  4. चूंकि बिना लक्षण या कम लक्षण वाले मरीजों को छींकने या खांसने जैसी परेशानी नहीं होती, इसलिए परिवार के सदस्य मास्क लगाकर उसके कमरे में जाकर उसे खाना दे सकते हैं।
  5. अगर मुमकिन हो तो ऐसे लोगों के लिए वॉशरूम अलग हों। अगर न हों तो इस्तेमाल करने के बाद उसे डिसइंफेक्ट कर दें।
  6. अगर कोरोना किसी वजह से हमारे घर तक पहुंच जाए तो परिवार के वे सदस्य जिनकी सेहत और इम्यून सिस्टम कुछ कमजोर होता है (जैसे बुजुर्ग, बीपी और शुगर पेशंट, 10 साल से कम उम्र के बच्चे या वे जिन्हें दिल की या कोई दूसरी बड़ी बीमारी हो) की सेहत पर नजर रखें। भले ही कोरोना बिना लक्षण वाला ही क्यों न हों।
  7. घर में ऑक्सीमीटर जरूर रखें। 600 रुपये की कीमत से ही ऑक्सीमीटर मिलने शुरू हो जाते हैं। Amazon & Flipkart आदि पर भी इनके ऑप्शन मिल जाएंगे। खरीदने से पहले फीडबैक जरूर देख लें। इसकी मदद से यह देखते रहें कि उस शख्स को ऑक्सीजन सही मात्रा में मिल रही है या नहीं। अगर ऑक्सीजन का लेवल 92 से ज्यादा है तो परेशानी की बात नहीं।
  8. कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने और लक्षण दिखने के 7 दिनों तक ऑक्सीजन स्तर पर नजर जरूर रखें। वैसे यह पूरी तरह पेशंट की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ लोगों में कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी लक्षण बने रह सकते हैं। उनमें सांस फूलने की समस्या भी दिख सकती है। ऐसे में पूरी तरह ठीक होने तक दिन में 3 बार (सुबह, दोपहर और रात में) ऑक्सीजन का स्तर जांचना जरूरी है। अगर बीच में कभी सांस की परेशानी हो तब भी ऑक्सीजन का लेवल जरूर देख लें।

एक्सपर्ट पैनल:

  • डॉ. राजकुमार, डायरेक्टर, पटेल चेस्ट इंस्टिट्यूट
  • डॉ. अंशुमान कुमार, डायरेक्टर, धर्मशिला हॉस्पिटल
  • डॉ. (प्रो.) संजय राय, कम्यूनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट, AIIMS
  • डॉ. जतिन आहूजा, वायरॉलजिस्ट, संत परमानंद अस्पताल
  • डॉ. प्रसन्ना भट्ट, सीनियर पीडिअट्रिशन
  • डॉ. शैलेंद्र सिंह, राजपूत सीनियर कंसल्टेंट, फिजिशन
  • डॉ. अंशुल वार्ष्णेय सीनियर कंसल्टेंट, फिजिशन