कोरोना महामारी से जूझ रहे लोगों को महंगाई की मार से जूझना पड़ रहा है। पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर की कीमतों में कहीं से भी राहत की उम्मीद नहीं दिख रही, जिसके असर से रसोई में उपयोग होने वाला खाद्य तेल भी काफी महंगा हो गया है।
जानकार इसकी वजह ट्रांसपोर्टेशन व पैकिंग के खर्च में वृद्धि होना मान रहे हैं। जबकि कुछ लोग इसका कारण जमाखोरी को मानते हैं। क्योंकि तेल का आपूर्ति सभी दुकानों में बनी हुई है। फिर महंगे दर पर बेचने के पीछे अधिक लाभ कमाना भी हो सकता है। इस पर प्रशासनिक अंकुश नहीं लगाया गया तो एक बड़ी आबादी की रसोईं से खाद्य तेल पूरी तरह से गायब हो जाएगी। 3 माह पहले तक जो खाद्य तेल बाजार में 90 से 115 रुपए प्रति लीटर में आसानी से उपलब्ध हो रहा था, वहीं तेल अब 175 से 190 रुपए लीटर बिक रहा है।
एक व्यक्ति एक साल में 15 लीटर तेल उपयोग में लेता है। जिले में 14 लाख की आबादी के हिसाब से एक साल में तेल की खपत 2 करोड़ 10 लाख लीटर हो जाती है। सरकार को परेशानी तो होगी लेकिन शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से इसे बीपीएल, एपीएल समेत अन्य वर्ग के लोगों को बेचे तो काफी राहत लोगों को मिलेगी।
जिला चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रामसिंह अग्रवाल ने कहा कि खाद्य तेलों की कीमतों से हर वर्ग के लोग प्रभावित हो रहे हैं। शासन को इस ओर ध्यान देना होगा। बाहर से माल कम आ रहा लेकिन कमी नहीं है। महंगाई बढ़ने का एक कारण जमाखोरी भी है इसे रोकना होगा तभी पब्लिक को राहत मिलेगी।