Sunday, September 6, 2026

छत्तीसगढ़ में 14वें मंत्री की नियुक्ति पर फिर हाईकोर्ट में सुनवाई, राज्य सरकार से 4 हफ्ते में मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार में 14वें मंत्री की नियुक्ति की संवैधानिक वैधता को लेकर हाईकोर्ट में एक बार फिर सुनवाई शुरू हो गई है। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में हुई, जहां अदालत ने राज्य शासन को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

14वें मंत्री की नियुक्ति को लेकर दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि मंत्रिपरिषद की संख्या संविधान में निर्धारित सीमा से अधिक है। याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता बसदेव चक्रवर्ती ने इस नियुक्ति की संवैधानिकता पर न्यायिक समीक्षा की मांग की है।

अनुच्छेद 164(1क) का दिया गया हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से संविधान के अनुच्छेद 164(1क) का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी राज्य में मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद की कुल संख्या विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। ऐसे में 90 का 15 प्रतिशत 13.5 होता है। इसी गणित और संवैधानिक प्रावधान की व्याख्या को लेकर 14वें मंत्री की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित था मामला

जानकारी के मुताबिक, 14वें मंत्री की नियुक्ति से जुड़ा यह मामला पहले सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। अब उस स्तर पर मामला निरर्थक होने के बाद हाईकोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ी है। डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

छत्तीसगढ़ में मंत्रिपरिषद के आकार को लेकर संविधान में निर्धारित 15 प्रतिशत की सीमा को लेकर यह विवाद सामने आया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि 90 सदस्यीय विधानसभा के हिसाब से मंत्रिपरिषद की संख्या निर्धारित संवैधानिक सीमा के अनुरूप होनी चाहिए।

अब हाईकोर्ट में राज्य शासन के जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि सरकार 14वें मंत्री की नियुक्ति को किस संवैधानिक और कानूनी आधार पर सही ठहराती है। मामले की अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने की उम्मीद है।

हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजर

14वें मंत्री की नियुक्ति को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की सुनवाई को छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के जवाब और अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।