knn24news/ चैत्र नवरात्र पर मंगलवार को देवी दरबारों में महाष्टमी की पूजा की गई। दोपहर बाद हवन अनुष्ठान किए गए। मंदिरों में हवन अनुष्ठान की विधि मंदिर प्रमुख और वहां के पुजारियों की माैजूदगी में की गई। कोरोना महामारी के कारण देवी भक्त शामिल नहीं हो पाए, लेकिन देवी मां की पूजा करने में जुटे भक्तों ने अपने-अपने घर पर ही महाष्टमी की पूजा की।
देवी स्वरूपा मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के लिए व्रतधारियों ने मंगलवार को कन्याओं का श्रृंगार कर उनकी पूजा कर उन्हें भोजन कराया। यह विधान बुधवार को नवमी पर भी अधिकांश लोग करेंगे। हवन पूजन और माता की महाआरती के बाद शाम को मंदिरों में हवन अनुष्ठान शुरू हुआ। मां सर्वमंगला के दरबार में प्रज्ज्वलित हजारों की संख्या में मनोकामना ज्योत कलश को शांत किया गया। यहां ज्योति कलश के साथ जवारा कलश का विसर्जन मंदिर से लगे हसदेव नदी में बुधवार को किया जाएगा। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण किसी भी मंदिर में सामूहिक हवन, पूजन नहीं हुआ और न ही ज्योति कलश विसर्जन के लिए शोभायात्रा निकाली गई।
सभी देवी मंदिरों में की पूजा-अर्चना
मां सर्वमंगला मंदिर के पुजारी ने बताया अष्टमी पर मां महागौरी की आराधना की गई। माता का अभिषेक, श्रंृगार किया। इसके बाद भोग लगाया गया। पूजा विधान मां कोसगाई देेवी, महिषासुर मर्दिनी मंदिर पाली, चोढ़ारानी, मां मातिनदाई समेत स्थानीय देवी दरबारों में महाष्टमी की पूजा की गई।
मां मड़वारानी में आज होगा हवन और विसर्जन
पहाड़ ऊपर स्थित मां मड़वारानी के दरबार में भी मंगलवार को महागौरी की पूजा विधानपूर्वक की गई। शाम को महाआरती में समिति के लोग ही शामिल रहे। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ यहां माता की आरती हुई। मंदिर समिति के विनोद कुमार साहू ने बताया कि यहां बुधवार को नवमी की पूजा के साथ ही हवन अनुष्ठान होगा। इसके बाद मंदिर के नीचे हसदेव नदी में ज्योति व जवारा कलश का विसर्जन सीमित के लोगों की मौजूदगी में होगा।








