कोरबा। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल माननीय रमेन डेका के दो दिवसीय कोरबा प्रवास के दौरान एक शर्मनाक घटना ने प्रशासनिक प्रोटोकाॅल की पोल खोल दी। भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर जब राज्यपाल से मुलाकात कर क्षेत्र की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपने पहुंचे, तो उन्हें बैठने तक की अनुमति नहीं दी गई।
प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित तस्वीरों में साफ दिखा कि कलेक्टर सोफे पर बैठे रहे, लेकिन पूर्व मंत्री के लिए सम्मानसूचक व्यवहार का पालन तक नहीं किया गया। यह घटनाक्रम उस वक्त और ज्यादा निंदनीय हो गया जब भाजपा की सरकार में ही अपने वरिष्ठ नेता के प्रति इस तरह की अवमाननापूर्ण रवैया अपनाया गया।
अध्यक्ष आदिवासी कांग्रेस कोरबा निर्मल सिंह राज ने इस घटनाक्रम पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह भाजपा की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है। उन्होंने कहा, “ननकीराम कंवर भाजपा के आधार स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने जीवनभर आदिवासी समाज के उत्थान और पार्टी की विचारधारा के लिए संघर्ष किया। आज उसी पार्टी की सरकार में उन्हें अपमानित होना पड़ा, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
निर्मल सिंह राज ने सवाल उठाया कि क्या यही प्रदेश सरकार का ‘आदिवासी सम्मान मॉडल’ है? क्या आदिवासी समाज भाजपा के लिए सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गया है? उन्होंने कहा कि यह अपमान केवल एक नेता का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समुदाय की अवहेलना है।
उन्होंने चेतावनी दी कि जनता और आदिवासी समाज इस अपमान को न भूलेगा, न माफ करेगा। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल माफी मांगने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
इस घटना ने प्रदेश की सियासत में नई बहस को जन्म दे दिया है कि आखिर भाजपा की प्राथमिकताओं में आदिवासी नेताओं और समाज का सम्मान किस स्थान पर है।