बालकों के स्थानीय युवक शहजाद अहमद ने बालकों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाया है। उन्हीने सवाल पूछा है कि भारत एल्युमिनियम कंपनी साफ तौर पर सेवा के नाम पर अपने बिजनेस को और बड़ा करना एवं आय के स्रोत को बढ़ाना चाहती है या फिर स्थानीय लोगों दीहाडी मजदूरों एवं छत्तीसगढ़ में निवासरत गरीब तबके के लोगों के मदद हेतु कदम उठाना चाहती है।
क्योंकि बालको प्रबंधन ने यह तो कह दिया कि वह राजधानी रायपुर मे 100 बैडो के कोविड-उपचार केंद्र की शुरुआत की है। और यह भी कहा कि इससे सरकार एवं प्रशासन की मदद होगी।परंतु उन्हें नहीं यह नहीं बताया कि इससे सरकार एवं प्रशासन की मदद कैसे होगी क्या वह निशुल्क उपचार करेंगे या समाज सेवा के नाम पर मोटे पैसे ने पैसे ऐंठने की तैयारी है।

इसके साथ ही उन्होंने कोविड उपचार केंद्र की स्थापना की है वह भी दिहाड़ी मजदूर गरीब तबके एवं स्थानीय लोगों की मदद हेतु बनाई गई है।परंतु उन्होंने इस चीज का उल्लेख नहीं किया की बालको स्थित कोविड-19 उपचार केंद्र में प्रत्येक व्यक्ति से प्रतिदिन ₹10000 के दर से चार्ज किए जाते हैं इसमें समाज सेवा एवं स्थानीय लोगों की मदद अर्थात सरकार एवं प्रशासन की मदद जैसी कोई व्यवस्था है ही नहीं
यह सिर्फ सिर्फ और सिर्फ अपने आय के सोर्स को बढ़ाने की नए नए पैंतरे हैं और आम जनता को गुमराह करने के तरीके हैं।

और अगर ऐसा नहीं है तो बालको प्रबंधन यह कह दे कि वह सिर्फ समाज सेवा करने के नाम से ऐसा कर रही है ना उन्होंने आज तक किसी से पैसे मांगे और ना ही आगे किसी से मांगेंगे ऐसा कह दे।

क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति जो कोरोना पॉजिटिव है अगर उसे उपचार हेतु प्राइवेट हॉस्पिटलों में जाना होता है तो उनके उपचार में लगभग 2 से 3 लाख रुपए आज के डेट में खर्च हो रहे हैं।इन्हीं सब चीजों को देखते हुए मुझे ऐसा लगता है कि बालको प्रबंधन भी इसे एक अच्छा अवसर पाकर अपनी आय के सोर्स को बढ़ाना चाहती है इसमें किसी भी प्रकार की कोई भी समाज सेवा नहीं है।बस हो गया कि समाज सेवा के नाम पर क्रेडिट लिया जाएगा और उस क्रेडिट को आने वाले समय में अपने इलीगल कार्यों को दबाने हेतु उपयोग किया जाएगा।