कोरबा। बालकों के ऐसे समस्त वार्ड जहां सी.एस.ईबी द्वारा दी गई बिजली का उपयोग किया जाता है उस हर वार्ड में बिजली की समस्या निरंतर बनी हुई है मनमाने हिसाब से विभाग द्वारा विद्युत की कटौती की जाती है ना ही कोई पूर्व सूचना ना ही कोई जानकारी दी जाती है।

दिन में 6 से 7 घंटे प्रतिदिन अलग-अलग समस्याएं को बताकर लाइट काट दी जाती है और जब जनता द्वारा सब स्टेशन को कॉल किया जाता है तो वहां के स्टाफ द्वारा यह कहा जाता है कि हमारे पास लाइनमैन की कमी होने के कारण हम पूर्ण रूप से अपने कर्तव्य को निभा नहीं पा रहे।

और प्रतिदिन केबल कट के गिरने कभी उस पर पेड़ गिर जाना या कभी ट्रकों के द्वारा खंभों या बिजली के तारों से टकरा जाने की समस्या निरंतर बनी रहती है।

इस संबंध में संबंधित अधिकारियों एवं विभाग के स्टाफ नए नए बहाने बताकर अपने कर्तव्य से भागना चाहते हैं।

कभी यह कहते हैं कि यह पेड़ जो केबल के ऊपर गिर रहा है यह पेड़ भारत एल्युमिनियम कंपनी के दायरे के अंतर्गत आता है और इसे काटने का परमिशन हमारे पास नहीं।

या फिर यह कह कर अपने कर्तव्य से पल्ला झाड़ते दिखाई पड़ते हैं कि हमें पेड़ काटने का परमिशन नहीं है इसलिए हम पेड़ को नहीं काट सकते इसलिए यह पेड़ हमेशा तार के ऊपर गिरता रहता है और इस तरह की छती निरंतर होती रहती हैं।

तो हम समस्त प्रताड़ित बस्ती वासी संबंधित अधिकारियों से यह पूछना चाहते हैं कि इसी प्रकार की समस्या वे हाई प्रोफाइल कॉलोनी में रहने वाले लोगों को क्यों नहीं बताते उनके यहां क्यों इस प्रकार की समस्याएं नहीं आती और ऐसी जगहों पर क्यों बरसात से पहले पेड़ की छटनी करवा दी जाती है और स्लम एरिया में इलेक्ट्रिक सप्लाई केबल के आसपास स्थित पेड़ों की छटनी क्यों नहीं करवाई जाती।

या फिर जो केबल खराब हो चुके हैं उन्हें समस्या जटिल होने से पहले ही क्यों नहीं बदले जाते हैं और ऐसे जगह जहां बड़ी-बड़ी गाड़ियों से टकराकर केबल टूटने का खतरा है वहां से रूट डायवर्ट कर इन समस्याओं का परमानेंट सॉल्यूशन क्यों नहीं किया जाता है।

एक सबसे बड़ी समस्या जो कि बालको में सी.एस.ईबी की पावर सप्लाई में आती है वह यह है कि सारे फीडर को एक ही कनेक्शन से जोड़ कर रखा गया है जैसे ही एक जगह समस्या आती है पूरे एरिया की सप्लाई बंद करनी पड़ती है।

तो संबंधित विभाग इस समस्या का भी निराकरण क्यों नहीं करती जिससे कि एक जगह की समस्या की वजह से सभी एरिया को एक साथ परेशानी ना उठानी पड़े।