राज्य सरकार ने भूमि से जुड़े मामलों में आम लोगों और निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए एक अहम फैसला लिया है। नए निर्णय के अनुसार अब सक्षम प्राधिकारी निर्धारित (विहित) प्रक्रिया का पालन करते हुए सीधे भूमि का पुनर्निर्धारण कर सकेंगे। इससे भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और पारदर्शी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अनावश्यक अनुमति और जटिल प्रक्रियाओं को समाप्त करना है। पहले जहां भूमि पुनर्निर्धारण के लिए कई स्तरों पर अनुमति लेनी पड़ती थी, वहीं अब सीधे सक्षम अधिकारी के स्तर पर निर्णय होने से समय और संसाधनों की बचत होगी।
इस फैसले से आवासीय, व्यावसायिक और अन्य विकास कार्यों को भी गति मिलेगी। खासकर नगर विस्तार वाले क्षेत्रों में जमीन से जुड़े मामलों में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आम नागरिकों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और निवेशकों को भी राहत मिलेगी।
राजस्व विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके।









