जांजगीर। मजदूरों को गांव में ही रोजगार मिल सके इस आशा से मनरेगा योजना शुरू की गई थी । इस योजना से गरीब किसानों को रोजगार मिलता है, लेकिन जांजगीर-चांपा जिले के कापन के आश्रित गांव में मजदूरों का हक को छीना जा रहा है। ग्राम मरकाडीह में मनरेगा के तहत स्वीकृत हुए कार्य में मशीनों की सहायता ली जा रही है। जबकि मनरेगा में किसी भी मशीन से कार्य नहीं कराया जा सकता । लेकिन मजदूरों के पेट पर लात मारकर संबंधित लोग अपनी जेब भर रहे हैं ।
जब हम मौके पर पहुंचे तो यहां बाकायदा जेसीबी के माध्यम से मिट्टी की खुदाई हो रही थी। लेकिन इस काम पर पर्दा डालने वाले लोग इस काम को रेलवे के लिए करना बता रहे थे । उनके डर से साफ तौर पर आप यह समझ सकते हैं कि यह कार्य किस तरह से किया जा रहा है
वैसे भी छत्तीसगढ़ मजदूरों के पलायन के मामले में काफी आगे है। मनरेगा योजना से उनको कुछ लाभ मिलता था, लेकिन गांव के जनप्रतिनिधियों के लालच के कारण उनको उनका हक नहीं मिल पाता । यही कारण है कि भूख की आग मिटाने मजदूर किसान दूसरे प्रदेशों की ओर रुक करते हैं । कई बार उन्हें बंधक बना लेने की खबर भी सुर्खियों में रहती है । लेकिन इन सबके बावजूद मनरेगा में इस तरह से मशीनी सहायता लेना शासन-प्रशासन की नियमों को ठेंगा दिखाना है ।











