
स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति मेडिकल काॅलेज की मान्यता के लिए बुधवार काे एनएमसी ने वर्चुअल (फाइनल) निरीक्षण किया। इसके लिए सुबह करीब 10.30 बजे मेडिकल काॅलेज प्रबंधन काे एनएमसी से मेल के जरिए सूचना दी गई, जिसमें 12 बजे वर्चुअल निरीक्षण के लिए तैयार रहने काे कहा।
तय समय के अनुसार मेडिकल काॅलेज के काैंसिल हाॅल में डीन डाॅ. अविनाश मेश्राम, उप अस्पताल अधीक्षक डाॅ. रविकांत जाटवर समेत सभी विभाग के फैकल्टीज माैजूद थी। तय समय पर लिंक आने के बाद दाेपहर करीब 1 बजे वर्चुअल निरीक्षण शुरू हुआ। इस दाैरान टेक्निकल प्राॅब्लम के चलते 15 मिनट तक बातचीत नहीं हाे सकी और डिस्कनेक्शन हाे गया।
काॅलेज प्रबंधन इंतजार करता रहा। एक घंटे बाद करीब 2.15 बजे फिर से कनेक्ट हाेने के साथ वर्चुअल निरीक्षण कर जानकारी ली गई। डीन डाॅ. मेश्राम ने प्रजेंटेशन देते हुए मेडिकल काॅलेज व अस्पताल में की गई तैयारियांे व व्यवस्था की जानकारी दी। एनएमसी ने फैकल्टीज की संख्या की जानकारी मांगी। करीब 2.45 बजे निरीक्षण समाप्त हुआ। एनएमसी ने मेडिकल काॅलेज प्रबंधन काे जरूरी कागजात मेल करने कहते हुए निरीक्षण से संतुष्ट हाेना बताया। बुधवार काे काेरबा के साथ ही महासमुंद के मेडिकल काॅलेज का भी वर्चुअल निरीक्षण किया गया।
4 और 5 मार्च काे हुआ था प्रारंभिक निरीक्षण, रिपार्ट में कई कमी बताई
टीम ने 4-5 मार्च काे दाे दिनी निरीक्षण किया था। एक माह में प्रारंभिक रिपाेर्ट जारी हुई, जिसमें कई कमियां बताई। काॅलेज प्रबंधन ने कमियां दूर कर तैयारी पूरी कर फाइनल रिपाेर्ट भेजी। 31 मई तक एनएमसी की टीम काे भाैतिक निरीक्षण के लिए आना था, लेकिन तय समय तक टीम नहीं पहुंची। इसके बाद वर्चुअल निरीक्षण का माैका बचा था।
वर्चुअल निरीक्षण से एनएमसी संतुष्ट डीन बोले- विश्वास है मिलेगी मान्यता
स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति मेडिकल काॅलेज के डीन डाॅ. अविनाश मेश्राम के मुताबिक एनएमसी की ओर से वर्चुअल निरीक्षण किया गया। प्रजेंटेशन व व्यवस्था का जायजा लेने के साथ जरूरी जानकारी ली गई। वर्चुअल निरीक्षण से एनएमसी संतुष्ट है। इस बार चिकित्सा शिक्षा के लिए मान्यता जरूर मिलेगी।
प्रबंधन ने पिछली बार की गलती से इस बार लिया है सबक
पिछले साल वर्चुअल निरीक्षण के दाैरान तत्कालीन डीन डाॅ. वायडी बड़गईया काॅलेज कैंपस में नहीं थे। उन पर काॅलेज कैंपस से ज्यादा अस्पताल में बैठने व बाहर रहने का जिक्र था। इससे वे काॅलेज का वर्चुअल निरीक्षण नहीं करा सके। वहीं फैकल्टी की कमी बरकरार थी। इसे ही एनएमसी ने आधार बना प्रथम सत्र के लिए मान्यता नहीं दी थी। इस बार मेडिकल काॅलेज प्रबंधन ने सबक लिया। वर्तमान डीन डाॅ. अविनाश मेश्राम एक माह से काॅलेज कैंपस में स्टाफ के साथ बैठते रहे। इसलिए वहां तैयारी भी पूरी तरह थी।
फैकल्टीज की 22 प्रतिशत कमी थी, अब ज्यादा पदस्थ
एनएमसी की टीम ने तीन माह पहले जब मेडिकल काॅलेज का निरीक्षण किया था, तब चिकित्सा शिक्षा विभाग से 14 और अस्पताल के 15 को मिलाकर 29 फैकल्टीज थी। वहीं मार्च के बाद 38 फैकल्टी बढ़ गई। एनएमसी के मापदंड के तहत प्रथम वर्ष की मान्यता के लिए 50 फैकल्टीज की जरूरत हाेती है, लेकिन यहां अब 77 फैकल्टीज पदस्थ हैं, जाे निर्धारित संख्या से ज्यादा है। एनएमसी के पूछने पर प्रबंधन ने बताया कि ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 5 साै मरीज की संख्या पहुंच रही है और रोजाना 4 साै एक्स-रे हाे रहे हैं। मंगलवार काे ओपीडी में 521 रजिस्ट्रेशन हुए थे।
अस्पताल में ओपीडी संख्या के साथ सीटी स्कैन, एक्स-रे, साेनाेग्राफी, लैब टेस्ट की सुविधा के बारे में पूछा। सभी विभाग, सेंट्रल लाइब्रेरी, लेक्चरर थियेटर, डेमाेस्ट्रेशन रूम, एनाटाॅमी म्यूजियम समेत काॅलेज की बिल्डिंग के अंदर व बाहरी हिस्से का निरीक्षण कराने कहा।
काॅलेज प्रबंधन ने वर्चुअल निरीक्षण काे माेबाइल से कनेक्ट किया। इसके बाद डीन डाॅ. मेश्राम ने हाथ में माेबाइल लेकर अपनी टीम के साथ बताए गए विभाग, कक्ष और हिस्से काे एनएनमसी काे दिखाते हुए निरीक्षण कराया।










