Friday, July 3, 2026

मुंशी प्रेमचंद जयंती: साहित्य पर चर्चा संगोष्ठी, साहित्य वितरण संपन्न 

कोरबा। देश के महानतम कथा लेखक मुंशी प्रेमचंद की 142 वी जयंती पर उन्हें नमन करते हुए उनके साहित्य और सामाजिक योगदान पर आज प्राथमिक पाठशाला में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुंशी प्रेमचंद की कहानी ईदगाह और पंच परमेश्वर के साथ-साथ उनके महत्ती योगदान पर चर्चा की गई।
प्राथमिक पाठशाला , पुरानी बस्ती कमला नेहरू महाविद्यालय निकट, के प्रधान अध्यापक जेपी कोसले ने एक विज्ञप्ति जारी करके जानकारी दी कि हिंदी के शीर्ष कहानी लेखक मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 18 80 में इलाहाबाद में हुआ था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संनददास दीवान थे अध्यक्षता प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेशचंद्र रोहरा जी ने की।
कार्यक्रम आज 30 जुलाई को 11:00 बजे आयोजित किया गया जिसमें सनंददास दीवान, एल्डरमैन ने कहा मुंशी प्रेमचंद जी के उपन्यास गोदान, रंगभूमि, सेवा सदन हिंदी की अमूल्य निधि है जो दशकों से भारतीय समाज के साथ-साथ पूरी दुनिया को रास्ता दिखा रहा हैं।
  श्री रोहरा ने कहा मुंशी प्रेमचंद की कहानी ईदगाह में हामिद नामक पात्र है जो अपनी दादी के लिए तीन पैसे का खिलौने नहीं बल्कि उस पैसे से एक चिमटा खरीद लाता है। यह कहानी यह शिक्षा देती है कि हमें जिम्मेदारी, प्रेम सद्भाव और पारिवारिक जीवन में विश्वास का कैसा ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने अपने उद्बोधन में मुंशी प्रेमचंद के मानसरोवर कहानी संग्रह की चर्चा की और कहा कि प्रेमचंद की अनेक कहानियां कालजयी है कफन, ईदगाह, पंच परमेश्वर अमर कहानियां है।
प्राथमिक पाठशाला में हुई इस संगोष्ठी में यह तथ्य भी सामने आ गया कि पूर्ववर्ती पाठ्यक्रमों में जिस तरह बालभारती में ईदगाह, पंच परमेश्वर, नमक का दरोगा कहानियां का पाठ सम्मिलित था जो अब नहीं है एल्डरमैन दीवान ने कहा कि इसके लिए वे मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल तक इस भावना को पहुंचाएंगे की मुंशी प्रेमचंद की कहानियां जो एक प्रकाश स्तंभ की भर्ती है उन्हें पाठ्यक्रम में पुनः शामिल किया जाए।
प्रधानाध्यापक जेपी कोसले के साथ अन्य स्टाफ ने संगोष्ठी में शिरकत की श्री कोसले ने कहा कि महान साहित्यकार प्रेमचंद को पूरी दुनिया में सम्मान है क्योंकि उनकी कहानियां उनका साहित्य अमर है। इस अवसर पर सुरेशचंद्र रोहरा ने बच्चों को साहित्य वितरित किया और आशा व्यक्त की कि साहित्य के प्रति बच्चों में रुचि पैदा होगी अंतिम में धन्यवाद ज्ञापन श्री कोसले ने किया।