Tuesday, September 29, 2026

मोटा-काला’ कहने से नहीं टूटता 7 फेरों का रिश्ता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज की तलाक की अर्जी

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति-पत्नी के बीच सामान्य घरेलू नोकझोंक या रंग-रूप पर की गई टिप्पणियां क्रूरता की श्रेणी में नहीं आती हैं। जांजगीर-चांपा निवासी पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी उसे सांवले रंग और शारीरिक बनावट को लेकर ताने मारती है। जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि शादी जैसे पवित्र बंधन को खत्म करने के लिए सिर्फ आरोप लगाना काफी नहीं, पुख्ता सबूत अनिवार्य हैं। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए पति की अपील खारिज कर दी। दरअसल, जांजगीर-चांपा निवासी दंपती का विवाह 7 मार्च 2019 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही दोनों पक्षों में मतभेद शुरू हो गए। पति ने फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक की अर्जी दी।