बिलासपुर में शिक्षकों की पोस्टिंग में रिश्वत मांगने वाले सस्पेंड टीचर नंदकुमार साहू और उसके सहयोगी टीचर योगेश पांडेय को पुलिस ने शुक्रवार रात गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अफसरों का दावा है कि इस गैंग में विभाग के अफसर भी शामिल हैं, जिसका खुलासा जांच के बाद होगा। टीचर के वसूली के ऑडियो को सामने लाया था। इसके बाद अफसरों में हड़कंप मच गया था।
IG रतनलाल डांगी के निर्देश पर SP पारुल माथुर ने भी इस मामले में जांच के आदेश दिए थे। एडिशनल SP गरिमा द्विवेदी को जांच की जिम्मेदारी दी गई। शुरूआत में पुलिस की टीम ने टीचर नंदकुमार साहू की तलाश करके उसे पकड़ लिया था लेकिन, शुरूआती पूछताछ में वह गोलमोल जवाब देने लगा। इस पर पुलिस ने उसे छोड़ दिया। पुलिस की साइबर सेल की टीम उसका कॉल डिटेल्स खंगालने में जुटी थी। जांच के दौरान पुलिस ने उसके सहयोगियों की भी जानकारी जुटाई। तब लाल बहादुर शास्त्री स्कूल में पदस्थ टीचर योगेश पांडेय का नाम सामने आया। फिर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों मिलकर चयनित शिक्षकों की सूची हासिल करके उन्हें फोन करते और मनचाही जगहों पर पोस्टिंग दिलाने के लिए 85 से 90 हजार रुपए की डिमांड करते थे। कुछ दिन पहले ही नंदकुमार का पैसा मांगने का ऑडियो वायरल हो गया था।
दोनों टीचर ने उगले राज
बताया जा रहा है कि पुलिस की पूछताछ में अब दोनों टीचर टूट गए हैं। उन्होंने पोस्टिंग के नाम पर वसूली के पूरे राज खोल दिए हैं। शुरूआती जांच और साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने वसूली करने वाले दोनों शिक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनयम के तहत केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में दोनों टीचर ने BEO ऑफिस के अफसरों से लेकर इस वसूली गैंग में शामिल अफसरों का नाम उगल दिया है। अब पुलिस विभाग के रिश्वतखोर अफसरों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में जुट गई है।
जॉइंट डायरेक्टर ने किया था सस्पेंड
शिक्षक नंदकुमार साहू बिल्हा ब्लॉक के सरकारी मिडिल स्कूल बहतराई में पदस्थ था। दो माह पहले ही वह सीधी भर्ती में चयनित होकर शिक्षक बना है। पदस्थापना के नाम पर लेनदेन का उसका ऑडियो वायरल होने के बाद पल्ला झााड़ने के लिए जॉइंट डायरेक्टर ने सिविल सेवा एवं वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियम के प्रावधान के अनुसार उसे निलंबित कर दिया। लेकिन, पुलिस अफसर को वसूली गैंग से बचाने का प्रयास करते रहे।