
प्रथम पूज्य गणेश चतुर्थी शुक्रवार को है। अब तक जिस तरह से गणेशोत्सव को लेकर उत्साह होता रहा है, वह बीते वर्ष की तरह इस बार भी चतुर्थी मेें नजर नहीं आएगा, लेकिन लोगों में भगवान गणेश के प्रति आस्था पहले से कम नहीं होगी। 10 सितंबर से शुरू होने वाली इस पूजा के लिए शहर में छोटी-छोटी मिट्टी की बनी मूर्तियों का बाजार सज गया है।
सार्वजनिक पूजा पंडालों में तैयारियां नहीं की गई हैं। शहर जिन स्थानों पर भव्य पंडाल लगाकर आयोजन होते रहे हैं, वहां बीते साल कोविड के बाद इस बार भी न सिर्फ पंडालों का आकार छोटा हो गया है, वरन मूर्ति भी छोटी हो गई हैं। आयोजन समितियों की मानें तो वर्षों से चली रही आयोजन की परंपरा जारी रखने के उद्देश्य से मूर्ति स्थापित कर सिर्फ रस्म निभाई जाएगी। यूं कहें कि समितियां पूजा क्रम जारी रखने के उद्देश्य से ऐसा की हैं। जहां समिति के सीमित लोग हर दिन पूजा पाठ करेंगे। ऐसे स्थानों पर 50 से अधिक लोग जमा नहीं हो पाएंगे। शासन द्वारा पहले 4 फीट मूर्ति बनाने की अनुमति दी गई थी, जिसे दो दिन पहले ही 8 फीट कर दिया है। समितियों का कहना है जब मूर्तियां बाजार में बनी ही नहीं हैं, तो 8 फीसदी की मूर्ति कहां से स्थापित करेंगे। दुर्गापूजन में जरूर उत्साह नजर आने की संभावना बनी हुई है।







