Tuesday, March 3, 2026

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘समान काम, समान वेतन’ से छत्तीसगढ़ के होमगार्ड जवानों को बड़ी राहत

नई दिल्ली। वर्षों के संघर्ष और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद छत्तीसगढ़ के नगर सेना (होमगार्ड) जवानों को बड़ी जीत मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ‘समान काम, समान वेतन’ के सिद्धांत को लागू करने का आदेश दिया है। अदालत ने सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि आदेश जारी होने के तीन माह के भीतर होमगार्ड जवानों को पुलिसकर्मियों के समान वेतन और भत्ते दिए जाएं।

संघर्ष की शुरुआत और अधिकारों की अनदेखी

इस न्यायिक लड़ाई की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी, जब बिलासपुर उच्च न्यायालय ने होमगार्ड जवानों को समान काम के बदले समान वेतन देने का आदेश दिया था। हालांकि, विभागीय स्तर पर इस आदेश को लागू नहीं किया गया, जिससे जवानों में असंतोष बढ़ा।

अपने अधिकारों की अनदेखी से आहत होकर होमगार्ड जवान डोमनलाल चंद्राकर और सुरेन्द्र कुमार देशमुख ने अवमानना याचिका दायर कर न्याय की लड़ाई जारी रखी।

लंबी कानूनी लड़ाई और अदालत का सख्त रुख

करीब चार साल तक चले इस न्यायिक संघर्ष में विभागीय अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए रिट अपील दायर की, जिसे 10 जून 2025 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद भी मामला सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा, जहां सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी खारिज कर दी गई।

13 फरवरी 2026: न्याय का निर्णायक दिन

13 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा कि तीन महीने के भीतर होमगार्ड जवानों को पुलिसकर्मियों के बराबर वेतन और भत्ते दिए जाएं। इस फैसले को वर्षों से जारी शोषण पर न्यायपालिका की सख्त टिप्पणी माना जा रहा है।