Thursday, August 20, 2026

सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र संकट:विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पर 3 घंटे 10 मिनट चली दलीलें, जज 9 बजे सुनाएंगे फैसला

महाराष्ट्र में 22 जून से शुरू हुआ सियासी घमासान लगातार आठवें दिन भी जारी है। सूरत से जिस राजनीतिक नाटक की शुरुआत हुई, उसके अहम डेवलपमेंट गुवाहाटी में हुए, लेकिन उसका क्लाइमैक्स अभी बाकी है। इस बीच महाराष्ट्र के राज्यपाल ने कल यानी 30 जून को शाम 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था। शिवसेना इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची , जहां फ्लोर टेस्ट पर वकीलों ने 3 घंटे 10 मिनट तक दलीलें पेश कीं।

सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट 9 बजे महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पर फैसला सुनाएगा। शिवसेना की तरफ से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पेश हुए। वहीं, शिंदे गुट की तरफ से पेश हुए एडवोकेट नीरज किशन कौल ने पैरवी की। एडवोकेट मनिंदर सिंह कौल की दलीलों का समर्थन करने खड़े हुए। आखिर में राज्यपाल की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं।

शिवसेना फ्लोर टेस्ट के खिलाफ, शिंदे गुट समर्थन में
इससे पहले सिंघवी ने फ्लोर टेस्ट पर आपत्ति जताते हुए दलील दी कि 16 बागी विधायकों को 21 जून को ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है। ऐसे में इनके वोट से बहुमत का फैसला नहीं किया जा सकता। ​​​​सिंघवी ने मांग की है कि या तो बहुमत का फैसला स्पीकर को करने दें या फिर फ्लोर टेस्ट टाल दें। ​

वहीं, कौल ने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार ही नहीं, उद्धव की पार्टी भी अल्पमत में आ चुकी है। ऐसे में हॉर्स ट्रेडिंग रोकने के लिए फ्लोर टेस्ट कराना ही सबसे बेहतर विकल्प है। इसे टाला नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिंदे के साथ गए विधायकों ने शिवसेना नहीं छोड़ी है। बहुमत उनके साथ है, इसलिए वही असली शिवसेना हैं।

कोर्ट रूम में जारी सुनवाई से जुड़े तमाम अपडेट्स यहां पढ़ें…

  • अभिषेक मनु सिंघवी: जो चिट्ठी हमें मिली है, उसमें लिखा गया है कि विपक्ष के नेता ने राज्यपाल से 28 जून को मुलाकात की। आज सुबह ही हमें कल फ्लोर टेस्ट कराने की सूचना दी गई है। जबकि, हमारे दो विधायक कोविड पॉजिटिव हैं। एक विधायक विदेश में है।
  • फ्लोर टेस्ट के लिए सुपर सोनिक स्पीड दिखाई गई है। फ्लोर टेस्ट निर्धारित करता है कि कौन सी सरकार लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है। बहुमत का पता लगाने के लिए फ्लोर टेस्ट किया जाता है। स्पीकर के फैसले से पहले वोटिंग नहीं होनी चाहिए। उनके फैसले के बाद सदन सदस्यों की संख्या बदलेगी।
  • जस्टिस कांत: क्या फ्लोर टेस्ट कराने के लिए कोई न्यूनतम समय सीमा तय है? क्या नया फ्लोर टेस्ट कराने में कोई संवैधानिक बाधा है?
  • अभिषेक मनु सिंघवी: हां, सामान्य तौर पर 6 महीने के अन्तराल से फ्लोर टेस्ट नहीं किया जाता। राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट के लिए मंत्रिमंडल से सलाह नहीं ली। जल्दबाजी में निर्णय लिया है। जब कोर्ट ने सुनवाई 11 जुलाई के लिए टाली थी, तो इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए था। 16 बागी विधायकों को 21 जून को ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है। ऐसे में इनके वोट से बहुमत का फैसला नहीं किया जा सकता।
  • जस्टिस कांत: अगर स्पीकर ने यह फैसला लिया होता, तो स्थिति अलग होती। डिप्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास का मसला पेंडिंग है, इसलिए अयोग्यता के मसले पर सुनवाई टाली गई थी।