Thursday, March 12, 2026

1517 दिनों के संघर्ष के बाद भू-विस्थापित किसान को मिली नौकरी, आंदोलन को मिली बड़ी सफलता

कोरबा, 27 दिसंबर . जमीन के बदले रोजगार की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत भू-विस्थापित किसानों के संघर्ष को आखिरकार बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS) और भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के संयुक्त आंदोलन के दबाव में एसईसीएल बिलासपुर मुख्यालय ने पुराने और लंबित रोजगार प्रकरण में एक भू-विस्थापित किसान को नौकरी देने की स्वीकृति जारी की है। इसके बाद कुसमुंडा परियोजना के महाप्रबंधक सचिन तानाजी पाटिल ने प्रभावित किसान रघुनंदन यादव को नियुक्ति पत्र सौंपा।

नियुक्ति पत्र प्रदान करते हुए महाप्रबंधक सचिन तानाजी पाटिल ने रघुनंदन यादव को एसईसीएल परिवार में शामिल होने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन भू-विस्थापित किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है, उन्हें नियमानुसार रोजगार देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। इस अवसर पर कुसमुंडा परियोजना के एपीएम, भू-राजस्व अधिकारी सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

रोजगार आदेश की जानकारी मिलते ही आंदोलन स्थल और जीएम कार्यालय के सामने खुशी का माहौल बन गया। छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू-विस्थापित किसानों ने मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया। आंदोलनकारियों ने इसे वर्षों से चले आ रहे संघर्ष की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि जब तक भूमि अधिग्रहण से प्रभावित सभी परिवारों को रोजगार नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि कुसमुंडा कोयला खदान विस्तार के लिए वर्ष 1978 से 2004 के बीच जरहा जेल, बरपाली, दुरपा, खम्हरिया, मनगांव, बरमपुर, दुल्लापुर, जटराज, सोनपुरी, बरकुटा, गेवरा, भैसमा सहित अनेक गांवों में बड़े पैमाने पर किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उस समय एसईसीएल की नीति जमीन के बदले रोजगार देने की थी, लेकिन बाद में नीति में बदलाव कर न्यूनतम दो एकड़ भूमि पर एक रोजगार का प्रावधान कर दिया गया, जिससे अधिकांश प्रभावित किसान रोजगार से वंचित रह गए।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि जिन किसानों की जमीन एसईसीएल ने अधिग्रहित की है, उन्हें स्थायी रोजगार मिलना चाहिए, क्योंकि भूमि ही किसानों की आजीविका का एकमात्र साधन है। यह भू-विस्थापित किसानों के संघर्ष की जीत है और आने वाले दिनों में सभी प्रभावित खातेदारों को रोजगार दिलाने के लिए आंदोलन और तेज किया जाएगा।

भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के रेशम यादव और दामोदर श्याम ने कहा कि पुराने लंबित मामलों में रोजगार का आदेश जारी होने से आंदोलन को नई ऊर्जा मिली है और अन्य विस्थापित परिवारों में भी उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा कि एकजुट होकर संघर्ष करने से ही सभी विस्थापितों को उनका हक मिल सकेगा।

नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले रघुनंदन यादव ने बताया कि वर्ष 1988 में उनकी जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसके बाद वर्षों तक उन्होंने रोजगार के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन निराशा ही मिली। छत्तीसगढ़ किसान सभा के मार्गदर्शन में 1517 दिनों तक चले संघर्ष के बाद उन्हें रोजगार मिला है, जिसे उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी जीत बताया।