Thursday, March 19, 2026

अब SC-ST-OBC के बीच ही आरक्षण का झगड़ा:मंत्री शिव डहरिया से मिलने पहुंचे आदिवासी छात्र, पूछा – ST का आरक्षण 32 प्रतिशत से कम करने की याचिका पर अपना पक्ष स्पष्ट करें

आरक्षण को लेकर दो बड़े आरक्षित जातीय समुदायों के बीच टकराव के हालत बनते दिख रहे हैं। मामला अनुसूचित जनजाति को मिले 32 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है। यह याचिका अनुसूचित जाति से जुड़ी गुरु घासीदास साहित्य एवं सांस्कृतिक संस्थान और पिछड़ा वर्ग के कुछ लोगों ने दाखिल की है। इसका फैसला नजदीक है, ऐसे में आदिवासी समाज की बेचैनी बढ़ गई है। आदिवासी छात्र संगठन के युवाओं ने आज मंत्री शिव कुमार डहरिया से कहा कि वे सतनामी समाज के बड़े नेता की हैसियत से इस याचिका पर अपना पक्ष स्पष्ट करेंआदिवासी छात्र संगठन के अध्यक्ष योगेश ठाकुर की अगुवाई में पहुंचे युवाओं ने नगरीय प्रशासन मंत्री शिव कुमार डहरिया से मिलने की कोशिश की। बाहर रहने से उनसे मुलाकात नहीं हो पाई तो छात्रों ने उनके निज सचिव को एक पत्र सौंपा। आदिवासी छात्रों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरु रुद्र कुमार और अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य पद्मा मनहर के नाम भी ऐसा ही पत्र रायपुर तहसीलदार को सौंपा है। योगेश ठाकुर ने कहा, हमने सतनामी समाज के इन वरिष्ठ नेताओं से यह जानने की कोशिश की है, क्या वे आदिवासियों के 32% आरक्षण के खिलाफ काम करने वालों के साथ है या आदिवासी और अनुसूचित जाति की समरसता के साथ।

ठाकुर ने कहा, हाईकोर्ट को आरक्षण संशोधन अधिनियम 2011 की वैधता पर फैसला करना है। यह फैसला 6 सितंबर को आए या अगली किसी तारीख में, SC-ST-OBC का 12-32-14 कुल मिलाकर 58% आरक्षण का बचना लगभग असंभव है। एक बात तय है कि इसका कोई राजनीतिक हल फिलहाल नहीं दिख रहा। आदिवासी हित में सुप्रीम कोर्ट से भी किसी राहत की बहुत आशा नहीं की जा सकती। योगेश ठाकुर ने कहा, उन लोगों ने दोनों समुदायों के बीच बनी एकता को कायम रखने की काफी कोशिश की है, लेकिन इस याचिका से उस पर संकट बढ़ता दिख रहा है।