Saturday, May 9, 2026

‘हम पर शिक्षा का भगवाकरण का आरोप है, लेकिन भगवा में गलत क्या है?’ : उपराष्ट्रपति

हरिद्वार: उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शनिवार को देश के लोगों से कहा कि वे अपनी ‘औपनिवेशिक मानसिकता” को त्यागें और अपनी पहचान पर गर्व करना सीखें. नायडू ने स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में शिक्षा की मैकाले प्रणाली को पूरी तरह से खारिज करने का आह्वान करते हुए कहा कि इसने देश में शिक्षा के माध्यम के रूप में एक विदेशी भाषा को थोप दिया और शिक्षा को अभिजात्य वर्ग तक सीमित कर दिया. नायडू ने कहा, ‘‘सदियों के औपनिवेशिक शासन ने हमें खुद को एक निम्न जाति के रूप में देखना सिखाया. हमें अपनी संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान का तिरस्कार करना सिखाया गया. इसने एक राष्ट्र के रूप में हमारे विकास को धीमा कर दिया. शिक्षा के माध्यम के रूप में एक विदेशी भाषा को लागू करने से शिक्षा सीमित हो गई. समाज का एक छोटा वर्ग शिक्षा के अधिकार से एक बड़ी आबादी को वंचित कर रहा है.”

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमें अपनी विरासत, अपनी संस्कृति, अपने पूर्वजों पर गर्व महसूस करना चाहिए. हमें अपनी जड़ों की ओर वापस जाना चाहिए. हमें अपनी औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागना चाहिए और अपने बच्चों को अपनी भारतीय पहचान पर गर्व करना सिखाना चाहिए. हमें जितना संभव हो भारतीय भाषाएं सीखनी चाहिए. हमें अपनी मातृभाषा से प्रेम करना चाहिए. हमें अपने शास्त्रों को जानने के लिए संस्कृत सीखनी चाहिए, जो ज्ञान का खजाना हैं.”