Thursday, July 16, 2026

कोयला चोरो के आतंक से आतंकित हुआ शहर, अधिकारी भी हुए बेबस, आखिर क्यों नहीं होती है कार्यवाही ?

उर्जाधानी कोरबा यू तो काले हीरे के लिए विश्व में प्रसिद्ध है, लेकिन आने वाले दिनों में ये जिला जाना जायेगा कोल माफियाओं की गुंडागर्दी के लिए, यहाँ ये कहना गलत नहीं होगा कि कोयला चोरी के चक्कर में बेकसूरों की जान मुश्किल में पड़ शक्ति है, कोरबा में कोल माफियाओं की करतुत किसी से छिपी नहीं है। कोयला चोर खुलेआम खदानों से कोयला चुरा रहे है। मानिकपुर, दीपका, गेवरा, कुसमुंडा, सुराकछार, रजगामार में ये लोग काफी सक्रिय है। यहां के जीएम मूकदर्शक बनकर चुपचाप बैठे है। पुलिस प्रशासन भी केवल कार्यवाही की औपचारिकता निभाती आरही है। ऐसे में यह प्रतीत होता हैं कि शासन एवं प्रशासन का इन कोल माफियाओं को आशीवार्द प्राप्त है।

आपको यह बताना भी उचित होगा कि कुछ दिन पहले मलगांव खदान के पास चाकूबाजी की घटना हुई थी। कोयला चोरो ने पत्रकार को दौड़ाकर मारा था, इसके बाद भी कोल माफियाओं के उपर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इससे आप इससे अंदाजा लागा सकते है कि कोयला के अवैध कारोबार में कितने पहुंच वाले लोग भी शामिल है। इनसे टकराने वालो का क्या हाल होता है। ये पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले भी कोयला चोर हथियारों से लैस होकर खदानों से कोयला की चोरी करवाते थे। रुपयों के लालच में कुछ स्थानीय पुलिस और कुछ खनिज अधिकारी भी इन चोरो के हाथो बीके हुऐ है, और इन्हे छूट मिल जाती है कोयला चोरी करने की।

बहरहाल कोल माफिया इतने हावी हैं कि ऐसा लगाता हैं कि उन्हे किसी मंत्री का सरंक्षण प्राप्त है। सूत्र बताते है की कोयला चोर ग्रामीणों को भी कोयला चोरी का तरीका बता रहे है, जिससे आने वाले दिनों में कोयला चोरी के मामले कम होंगे ऐसी कोई सम्भावना नहीं है।

जब तक शासन एवं पुलिस प्रशासन इन माफियाओं के उपर अपने कड़े तेवर नही दिखाएगी तब तक कोल का अवैध कारोबार जड़ से खत्म नहीं होगा।

अतः इस्तानी नेतागड़, सांसद, विधायक, जनपद सदस्य, सरपंच एवं पंच इन घटनाओं के बाद भी चुप्पी सादे हुए है, यहां भी सोच का विषय है ?