कोरबा: बिगड़ते पर्यावरण संतुलन के लिए एक और पेड़ों को लगाया जा रहा है दूसरी ओर औद्योगिकीकरण के नाम पर पेड़ों की कटाई का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। सड़क निर्माण हो या फिर कोई उद्योग लगाना हो पेड़ों की बलि दी जा रही है। कोरबा में भी परसा कोल खदान की स्वीकृति मिलने के बाद हसदेव अरण्य को तबाह करने का दौर शुरू हो गया है । हरदेव अरण्य जो कोरिया सरगुजा कोरबा रायगढ़ तक फैला है इसमें लगभग एक लाख पेड़ों की कटाई होगी। इतना ही नहीं इस कटाई से जैवविविधता पर भी संकट छा जाएगा । इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने आंदोलन की तैयारी कर ली है। आज उन्होंने इसी क्रम में कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और हसदेव अरण्य को बचाने की अपील की।







