
knn24news/ मुस्लिम लगातार कह रहे थे कि ज्ञानवापी मस्जिद पर प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट यानी पूजा स्थल कानून लागू होता है। लिहाजा, इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई होनी ही नहीं चाहिए।
अब शिवलिंग मिलने के बाद यही बात हिंदुओं के पक्ष में आ गई है। जब प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट लागू होता है और वहां शिवलिंग मिला है, तो इसका मतलब हुआ कि वहां पहले मंदिर था और बाद में मस्जिद बनाई गई। इसलिए मस्जिद टूटनी चाहिए। इस केस में भी फैसला अयोध्या जैसा ही आएगा।
यह बात 33 साल में हिंदुओं के 110 केस लड़ चुके वकील हरिशंकर जैन ने कही। वो कहते हैं- 4 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई करेगा।
1989 से सिर्फ हिंदुओं के केस लड़ रहे जैन
69 साल के हरिशंकर जैन 1989 से सिर्फ हिंदुओं के केस ही लड़ रहे हैं। वो भी बिना किसी फीस के। अब तक छोटे-बड़े ऐसे 110 केस लड़ चुके हैं, जो हिंदू पक्षों से जुड़े रहे हैं। अभी सुर्खियों में हैं, क्योंकि मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि इन्हें हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद वाले केस में पैरवी से हटा दिया है।
हरिशंकर जैन ने भास्कर से कहा- मुझे कोई नहीं हटा सकता। 5 में से 4 क्लाइंट तो मेरे साथ हैं। जिन्होंने गद्दारी की उन्हें भी मैंने ही अपॉइंट किया था। इसलिए इन अफवाहों के बारे में न सोचें। ज्ञानवापी, कुतुब मीनार, ताजमहल, मथुरा, टीले वाली मस्जिद और भोजशाला सहित मेरे पास अभी 7 बड़े केस हैं। देशभर में कई जगहों से हर रोज फोन आते हैं। जहां-जहां मंदिर तोड़े गए हैं और जिसके पुख्ता प्रमाण हैं, उन सबकी लड़ाई लडूंगा। जहां के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं, वहां की लड़ाई मैं नहीं लड़ता।
तहखाने के बीचों-बीच आदि विश्वेश्वर का स्थान है, यहीं पहले शिवलिंग स्थापित था। मस्जिद के नीचे का हिस्सा अब भी पुराने मंदिर के ढांचे पर ही खड़ा है। फर्स्ट फ्लोर पर मंदिर के शिखर पर ही गुंबद रख दी गई। तीनों गुंबदों के नीचे हिंदुओं से जुड़े तमाम प्रतीक-चिन्ह मिले हैं।वीडियोग्राफी हो चुकी है। शिवलिंग की भी वैज्ञानिक जांच हो जाएगी, तो जो लोग उस पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वो चुप हो जाएंगे।
1034 में राजा भोज ने यहां भव्य गुरुकुल बनाया था, जहां संस्कृत व्याकरण, ज्योतिष की पढ़ाई होती थी। अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला को ध्वस्त कर दिया था।
बाद में दिलावर खां गौरी ने 1401 में भोजशाला के एक भाग में मस्जिद बनवा दी। 1514 में महमूद शाह खिलजी ने शेष भाग पर भी मस्जिद बनवा दी।
बाद में भोजशाला को पुरातत्व विभाग के अधीन कर दिया गया। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के पास इसकी देखरेख का जिम्मेदारी है।
2003 से हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा की अनुमति और शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज की अनुमति दी गई।
हम यहां मुस्लिमों के नमाज के खिलाफ हैं, क्योंकि यह हिंदुओं की जगह है। हमने कोर्ट से पूरे एरिया के आर्कियोलॉजिकल सर्वे की मांग भी की है।









