Friday, July 3, 2026

राजस्थान में अवैध खनन से दुखी संत का आत्मदाह:80% झुलसे बाबा विजय दास, खदान बंद कराने 551 दिन से आंदोलन कर रहे थे

राजस्थान में भरतपुर के पसोपा गांव में बाबा विजय दास नाम के संत ने अवैध खनन के विरोध में खुद को आग लगा ली। वे साधु-संतों के साथ पिछले 551 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। अपने ऊपर केरोसीन डालकर आग लगाने के बाद बाबा राधे-राधे कहते हुए दौड़ने लगे। पुलिसकर्मियों ने कंबल डालकर आग बुझाई, लेकिन वे करीब 80 फीसदी जल चुके थे।

बाबा को भरतपुर के राज बहादुर मेमोरियल अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। बाबा के आत्मदाह के बाद राजस्थान के खान मंत्री बैकफुट पर आ गए। खान मंत्री प्रमोद जैन भाया ने कहा कि संत जिन खानों को बंद करने की मांग कर रह हैं, वे लीगल हैं। फिर भी उनकी लीज शिफ्ट करने पर विचार किया जाएगा।

इसी आंदोलन से जुड़े एक और संत बाबा नारायण दास 33 घंटे टॉवर पर चढ़कर बैठे रहे। वे मंगलवार सुबह 6 बजे से मोबाइल टॉवर पर चढ़े थे और समझाने के बाद बुधवार दोपहर वापस उतर आए। वे बरसाना के रहने वाले हैं। आंदोलन को देखते हुए संभागीय आयुक्त सांवरमल वर्मा ने भरतपुर के पांच कस्बों में इंटरनेट बंद कर दिया था।

राजस्थान के भरतपुर जिले की डीग, कामां तहसील का इलाका 84 कोस परिक्रमा मार्ग में पड़ता है। साधु-संतों का कहना है कि यह धार्मिक आस्था से जुड़ी जगह है, यहां हिंदू धर्म के लोग परिक्रमा करते हैं, इसलिए यहां वैध और अवैध, दोनों तरह के खनन बंद होने चाहिए। इसी मांग को लेकर वे 551 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।

संत इस जगह चारों धाम मानते हैं
साधु-संतों का दावा है कि कनकांचल और आदि बद्री पर्वत धार्मिक आस्था का प्रतीक है। आदि में भगवान बद्री के दर्शन होते हैं, जबकि कनकांचल पर्वत में कई पौराणिक अवशेष हैं। इनकी श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं। इस जगह पर चारों धाम हैं।