Saturday, July 4, 2026

कोरबा: कबाड़ के जुगाड़ से बना नशे का सामान, बालपन चढ़ा नशे की भेंट, पढ़िए पूरी खबर

कोरबा- कबाड़ से जुगाड़ कर बच्चों को सामानों के पुर्न इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जाता है। लेकिन क्या आप ये सोच सकते हैं कि कबाड़ में फेंकी गई चींज से वे नशे में इस्तेताल होने वाला सामान भी बना सकते है। जी हां ये सच है, प्लास्टिक की बोतल और एक पाइप के मदद से बच्चो ने हुक्का बार में इस्तेमाल होने वाला पंप बनाया और लग गए कश लगाने।

वरिष्ठ भाजपा नेता केदारनाथ अग्रवाल ने मुड़ापार क्षेत्र में बच्चों को हुक्का पीते पकड़ा। सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करने उन्होने बच्चों के माता पिता का समझाईश दी। लेकिन जिस गति से बच्चों नशे की लत में फंसते जा रहे है। वो काफी चिन्तनीय विषय है। माता पिता सहित बच्चों के कार्य करने की संस्था को इस विषय पर गंभीरता से विचार विमर्श करना चाहिए।

आज की भागदौड़ की जिंदगी में लोग अपने बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं दे पा रहे हैं। लिहाजा नैतिक मूल्यों में गिरावट आ रही है और तेजी से बाल अपराधियों की संख्या बढ़ रही है। कही ना कही इन अपराधों का संबंध नशे से होता है।आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में पांच साल में 7 हजार से अधिक बाल अपराध के मामले दर्ज हुए हैं।

अपराध के दलदल में वयस्क और अधेड़ ही नहीं बल्कि बच्चे भी धंसते जा रहे हैं। हत्या, बलात्कार और लूट जैसे जघन्य अपराध तक करने में बालमन नहीं हिचक रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि बाल संष्ङेक्षण गृह ;सुधार गृह से रिहा होने के बाद भी नाबालिग दोबारा अपराध करने लगे हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि नाबालिगों के लिए कानून लचीला होने के कारण बाल अपराधियों को या तो जमानत पर रिहा कर दिया जाता है या फिर तीन साल बाद वे सुधार गृह से रिहा हो जाते हैं।

पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक नाबालिगों द्वारा छत्तीसगढ़ में जघन्य अपराध को अंजाम देने के मामले हर साल बढ़ रहे हैं। वर्तमान में 7 हजार से अधिक प्रकरण बाल न्यायालयों में लंबित हैं। इनमें से 21 फीसदी आदतन बाल अपराधी हैं। बाल अपराधियों की बढ़ती संख्या ने सबको चिंता में डाल दिया है। इसके लिए श्रमिक बस्तियों में जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता हैए ताकि कम उम्र से ही बच्चों की गलतियों और उनकी आदतों पर पालक ध्यान दें।