Wednesday, August 19, 2026

जिले में नया गया भोजली तिहार

कोरबा  . हमारे छत्तीसगढ़ में कई पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें से एक है भोजली पर्व। यह अगस्त के महीने में मनाया जाता है। इसमें सभी वर्ग की महिलाएं, बुज़ुर्ग और बच्चे शामिल होते हैं। इस पर्व पर छत्तीसगढ़ के भोजली लोक गीत गाए जाते हैं।

कोरबा ज़िले के कई जगहों में भोजली पर्व मनाया जाता है लेकिन अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नियमों से मनाया जाता है। भोजली असल में गेहूं से निकला हुआ पौधा होता है। सभी लोग भोजली को देवी का रूप मानते हैं। भोजली पर्व में इस पौधे की पूजा अच्छे सेहत के लिए की जाती है।

इस पर्व को सभी बड़े धूम-धाम से मनाते हैं। भोजली बोने के लिए सबसे पहले कुम्हार के घर से खाद-मिट्टी लाई जाती है। खाद-मिट्टी कुम्हार द्वारा पकाए जाने वाले मटके और दीए से बचे “राख” को कहा जाता है। भोजली पर्व का यह नियम है कि खाद-मिट्टी कुम्हार के घर से ही लाया जाए। इसके बाद महतो के घर से चुरकी और टुकनी (टोकरी) लाई जाती है। महतो गाँव या समाज के सबसे वृद्ध और सम्मानित व्यक्ति होते हैं। इसके बाद राजा के घर से गेहूं लाया जाता है। राजा बैगा को कहते हैं, जो गोंड़ समुदाय से होते हैं। इस पर्व पर वे देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। गेहूं को सुबह पानी में भिंगोया जाता है फिर शाम को गेहूं निकालकर चुरकी और टुकनी में डाला जाता है। गेहूं वाले इस टोकरी में फिर खाद को डाला जाता है। पांच दिनों में ही गेहूं से पौधे (भोजली) निकलकर बड़े हो जाते हैं।