Thursday, July 2, 2026

मुक्तिबोध सामाजिक यथार्थ, फंतासी और जीवन के महा रचयिता – शीतेंद्र नाथ चौधरी

कोरबा। गजानन माधव मुक्तिबोध हिंदी के महानतम कवियों में एक हैं उन्होंने अपने काव्य शिल्प के माध्यम से अनेक वर्जनाओं को तोड़ा अपने लगभग 10 वर्ष के लेखन काल में उन्होंने देश को अपने साहित्य के माध्यम से जो दिशा दी है वह कभी मिटाई नहीं जा सकती।

उक्त आशय के विचार आज प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित गजानन माधव मुक्तिबोध की पुण्यतिथि पर आयोजित “मुक्तिबोध आज के समय” संगोष्ठी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के आसंदी से वरिष्ठ साहित्यकार शीतेंद्रनाथ चौधरी ने एक साहित्यिक की डायरी और चांद का मुंह टेढ़ा है किताबों का उल्लेख करते हुए कहा- गजानन माधव मुक्तिबोध वस्तुतः यथार्थ और फेंटेसी के कवि हैं उनकी कहानियां उनकी कविताएं ऐसे दर्द से उपजी हैं जो उन्होंने अपने जीवन काल में भोगा था।

संगोष्ठी में अध्यक्षता करते हुए कथाकार कामेश्वर पांडेय ने अपने महत्ती उद्बोधन में कहा मुक्तिबोध का साहित्य एक उर्जा से ओतप्रोत है उनकी कविताएं तो जीवन के सच से हमें रूबरू कराती हैं मुक्तिबोध का एकमात्र उपन्यास विपात्र है जो अपने सरोकारों में जीवन के सत्य को उद्धरित करता है।

प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेशचंद्र रोहरा ने कहा मुक्तिबोध प्रेमचंद और रेणु के पश्चात हिंदी के सबसे बड़े लेखक और कवि हैं उनका अधिकांश लेखन छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में लिखा गया यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संगोष्ठी में संरक्षक शिवशंकर अग्रवाल, लेखक घनश्याम तिवारी, भास्कर चौधरी सनंददास दीवान एल्डरमैन, श्याम बिहारी सिंह, बनाफर,सूरज, प्रकाश राठौर,

कमल सरविद्या ने शिरकत की।

कवि घनश्याम तिवारी ने संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा -बिलासपुर में एक आयोजन हुआ था जिसमें भाऊ समर्थ ए के हंगल जी का आगमन हुआ था उस दरम्यान गजानन माधव मुक्तिबोध पर विशेष चर्चा हुई थी जिससे मैं ने अनुभव किया कि मुक्तिबोध की धार कितनी गहरी है।

सनंददास दीवान एल्डरमैन ने आज के समय मुक्तिबोध विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा – कवि मुक्तिबोध एक समर्थ और कालजयी कृति कार है। कार्यक्रम में भास्कर चौधरी ने कहा कवि मुक्तिबोध की भाषा शैली दुरूह है उनकी फैंटेसी चेतना जागृत करती है।

लेखक सुरज प्रकाश ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष सुरेशचंद्र रोहरा ने मुख्य अतिथि शीतेंद्रनाथ चौधरी को अपनी एक किताब महात्मा गांधी हास्य परिहास भेंट की।