नारायणपुर में धर्मांतरण को लेकर हुए बवाल के बाद इलाके में तनाव की स्थित बनी है। फोर्स अब भी प्रभावित क्षेत्र में तैनात है। दरअसल बस्तर में मोटे तौर पर दो आदिवासी वर्ग हैं, एक जो देवी-देवताओं को मानते हैं, दूसरे वो जो चर्च जाते हैं। इन्हीं दोनों के बीच लड़ाई चल रही है। हालात इतने खराब हैं कि जिन्होंने पहले कभी धर्म बदल लिया है, उनकी लाशों को गांवों में दफनाने नहीं दिया जा रहा। अगर दफना दी गई हैं, तो उखाड़ी जा रही हैं।
आदिवासियों को डर है कि जिस तेजी से धर्मांतरण बढ़ा है, उससे उनकी संस्कृति नष्ट हो जाएगी। यही वजह है कि धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को गांव से निकाला जा रहा है। अविश्वास इतना बढ़ गया है कि मीडिया, पुलिस से भी लगातार झड़पें हो रही हैं। नारायणपुर के एसपी का सिर फूटना इसी की एक कड़ी थी। कोंडागांव के 4 चर्चों में 250 लोगों को शरण दी गई है। बाजारपारा के चर्च में ही 30 परिवार हैं। मेटोडिड चर्च में 70 लोग हैं। किराए के मकानों में भी शरणार्थी रखे गए हैं।










