कोरबा। चुनावी वादे क्या केवल चुनाव जीतने के हथकंडे है?क्या विजयश्री मिलने के बाद नेता जनता को पूछने भी नही जाते? क्या नेताओ की जमीर इतनी मर जाती है कि वो केवल लोगो को वोट देने का माध्यम मान लेते हैं, एक इंसान नही? ये सारे प्रश्न वार्ड क्रमांक 13 की जनता के मन में अपने वार्ड की पार्षद ऋतु चौरसिया को लेकर उमड़ रहा है। दरअसल चुनाव के समय जनता का चरणवंदन करते नही थकने वाली पार्षद की कार्यशैली से वार्डवासी काफी परेशान है।
चुनाव के समय वार्ड का चौतरफा विकास करने की कसम खाने वाली पार्षद चुनाव जीतने के बाद चौतरफा तो छोड़ो एक तरफा भी विकास नहीं करा पाए। यहां तक की चुनाव के बाद एक आद कार्यक्रम को छोड़ दे तो उन्होंने वार्ड में झांकने की भी जहमत नहीं की।
पानी, बिजली सड़क की दुर्दशा देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है की विकास कहा कहा हुआ है। जर्जर हो चुके सड़क जगह जगह कचरे का अंबार और उन पर मुंह मारते मवेशी वार्ड की पहचान बन गए हैं। इस वार्ड में बिजली व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। शहर के कमोबेश अधिकतम व्यापारिक प्रतिष्ठान, बैंक इस क्षेत्र में संचालित होते हैं । लेकिन इन सब के बाद भी यहां की बिजली व्यवस्था सुधारने में क्षेत्रीय पार्षद नाकाम साबित हुई।
पिछले दिनों अघोषित बिजली कटौती से जहां क्षेत्र की जनता त्राहिमाम कर रही थी । वहीं पार्षद अपने वातानुकूलित कमरे में बैठकर आराम कर रही थी । दोपहर 12:00 बजे से कटी बिजली रात को वापस आई। इस दौरान दलगत राजनीति से ऊपर उठकर महापौर राजकिशोर प्रसाद टीपी नगर पहुंचे । लेकिन यहां की पार्षद अपने कमरे से ना ही बाहर आए ना ही उन्होंने बिजली व्यवस्था सुधरवाने की कोई कोशिश की।
राजनीति से उठकर लोगों की समस्याओं को जानने की कोशिश जिस तरह से महापौर राजकिशोर प्रसाद ने की उसकी लोगों ने काफी सराहना की । लेकिन वही लोग अपने वार्ड की पार्षद से काफी नाराज हैं । उनका कहना है कि चुनाव जीतने के बाद ना ही पार्षद वार्ड में आई नाही क्षेत्र की समस्याओं को जानने का प्रयास किया। इस तरह की कार्यशैली कुल मिलाकर वार्ड पार्षद की असंवेदनशीलता को ही प्रदर्शित करता है।