knn24news/ कोविड-19 से जूझ रहे लोग एक नई तरह की परेशानी का सामना कर रहे हैं। कोरोना से रिकवर होने के दौरान कई मरीजों को हृदय के रोग हो रहे हैं और कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक की वजह से जान जा रही है। हेल्थ एक्सपर्ट कह रहे हैं कि कोरोना के इलाज के दौरान कई दवाएं दी जा रही हैं, जो खून के थक्के भी बना सकती हैं। पर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह सबके साथ नहीं हो रहा। रिकवरी के दौरान सावधानी रखी जाए तो मरीज की जान को कोई खतरा नहीं है।
कुछ स्टडी के अनुसार जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज या डायबिटीज है, उनमें से 15-20 प्रतिशत को ही समस्याएं बढ़ रही हैं। इनमें से 5% को हार्ट अटैक आने का खतरा है। पर सबसे ज्यादा नुकसान युवाओं को हो रहा है, जिन्हें पहले हार्ट से जुड़ी कोई बीमारी नहीं रही है या उन्हें लक्षणों के अभाव में इसकी जानकारी ही नहीं हुई है। कोरोना इन्फेक्शन से रिकवरी के दौरान सामने आ रहे इन लक्षणों को समझने और समय पर इलाज के लिए हमने दिल्ली के द्वारका स्थित मणिपाल हॉस्पिटल्स के चीफ ऑफ क्लीनिकल सर्विसेज, कार्डियक साइंसेस प्रमुख और चीफ कार्डियोवस्कुलर सर्जन डॉ. वाय के मिश्रा से बात की।
आइए, समझते हैं कि कोविड-19 और ह्दय रोगों का आपस में क्या संबंध है-
कोविड-19 से रिकवर होने के बाद भी क्या लोग हार्ट डिजीज का सामना कर रहे हैं?
- हां। कोविड-19 की जानलेवा दूसरी लहर युवाओं को ज्यादा प्रभावित कर रही है और कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां मरीजों को हार्ट डिजीज की कोई हिस्ट्री न होने के बाद भी हार्ट अटैक आया है। युवा मरीजों में यह मामले पल्मोनरी एलेमा (फेफड़ों में अधिक फ्लुइड) होने से सामने आ रहे हैं। इस वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है और रेस्पिरेटरी ऑर्गन काम करना बंद कर देते हैं।
- इसी तरह एक्यूट मायोकार्डिटिस होने का खतरा बढ़ जाता है, जो कि हार्ट मसल्स में होने वाली सूजन है। इस केस में मरीज के जीवित रहने की संभावना काफी कम हो जाती है। जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज है, उनमें कोविड-19 से रिकवर होने के बाद दिल में सूजन और खून के थक्के जमने की समस्या बढ़ जाती है।








