कोरबा। जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में कटघोरा क्षेत्र में करीब 40 हाथियों के विशाल दल ने दस्तक देकर ग्रामीणों में दहशत फैला दी। बीती रात हाथियों की गतिविधियों से न सिर्फ ग्रामीण बल्कि खबर कवरेज करने पहुंचे पत्रकार भी घंटों तक जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हाथियों के लगातार मूवमेंट के बावजूद मैदानी वन अमला कितना अलर्ट रहता है, क्योंकि पूरी रात इलाके में कोई जिम्मेदार अमला नजर नहीं आया।
गांव में तबाही, परिवार बेघर
कटघोरा वनमंडल के जटगा रेंज अंतर्गत धोबीबारी में दो दिन पहले हाथियों के दल ने भारी तबाही मचाई। करीब 10 घरों को तोड़ दिया गया और कुछ पालतू जानवरों को भी मार डाला गया। गरीब परिवारों का आशियाना उजड़ गया और अब वे खुले आसमान के नीचे पेड़ों के सहारे रात गुजारने को मजबूर हैं।
कवरेज करने पहुंचे पत्रकार भी फंसे
हाथियों द्वारा मचाई गई तबाही की खबर कवरेज करने शुक्रवार को पहुंचे पत्रकार—शारदा पाल, नानक सिंह राजपूत, लक्ष्मण महंत और हरीश साहू—भी ग्रामीणों के साथ खतरे में घिर गए। हाथियों ने इलाके से निकलने का एकमात्र रास्ता ही रोक दिया, जिससे सभी लोग घंटों तक अंधेरे में सांसत भरी स्थिति में फंसे रहे।
अंधेरे में दहशत भरी रात
हाथियों की चिंघाड़ और लगातार मूवमेंट के बीच ग्रामीण और पत्रकार पूरी रात भय के साए में रहे। किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंचकर सभी ने राहत की सांस ली।
वन विभाग पर उठ रहे सवाल
लगातार हो रहे नुकसान और समय पर मदद न मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद समय पर चेतावनी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जाती।







