कोरबा विधायक राजस्व मंत्री और अभी-अभी बिलासपुर के बनाए गए प्रभारी मंत्री जयसिंह अग्रवाल हमेशा अपनी कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं या यह कहीं की भूपेश सरकार के सबसे चर्चित मंत्री हैं तो यह बात अतिशयोक्ति नहीं होगी। विवादों का विधायक जयसिंह अग्रवाल से पुराना नाता है चाहे वह मामला डामर घोटाले का हो या तत्कालीन कोरबा कलेक्टर पी दयानंद से विवादों का। लेकिन हद तो तब हो गई जब मंत्री जी के शुभ वचन का ऑडियो वायरल हो गया वायरल ऑडियो में राजस्व मंत्री रेंजर को देख लेने की धमकी दे रहे हैं छत्तीसगढ़ के केबिनेट मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने रेंजर से फोन पर गाली-गुप्तार किया और रेंजर ने जब इसका विरोध किया तो मंत्री ने उसकी छुट्टी करा दी। वन विभाग ने रेंजर का अंबिकापुर ट्रांसफर कर दिया है।
बताते हैं, सूबे के दबंग मंत्री जयसिंह को रेंजर लक्ष्मण पात्रे से कोई काम था। उन्होंने पीए से फोन लगवाने की बजाए सीधे अपने मोबाइल से उसका नम्बर लगा दिया। मंत्री ने कहा, तुरंत आ जाओ। रेंजर के पास मंत्री का नम्बर नहीं था, इसलिए उसने पहचाना नहीं। उसने साफ बोल दिया, ये अभी नहीं आ सकता। रेंजर का आरोप है कि इस पर मंत्रीजी बुरी कदर भड़क कर फोन पर गाली-ग्लौच कर डाले। उन्होंने यहां तक कह डाला। तू जानता नहीं, हाथ-पैर तोड़वा दूंगा।
रेंजर ने बाद में ट्रू काॅलर पर नम्बर देखा तो पता चला प्रदेश के एक मंत्रीजी का नम्बर है ये। उसने हिमाकत करते हुए काॅल बैक कर दिया….कहा, माननीय आप डांट लीजिए, मगर इस तरह गाली मत दीजिए। इस पर मंत्रीजी बिगड़ गए। बताते हैं, उन्होंने तुरंत पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी को फोन लगा डाला। बोले, रेंजर ने मुझसे बदतमीजी की है, फौरन सस्पेंड करो। पीसीसीएफ से जब बात नहीं बनी तो वन मंत्री मोहम्मद अकबर को उन्होंने फोन खड़का दिया। वन मंत्री और पीसीसीएफ ने जब इस मामले में पता लगाया तो रेंजर का कोई कसूर नहीं नजर आया। रेंजर ने सिर्फ गाली न देने का आग्रह किया था। इस पर कोई ग्राउंड बनता नहीं, जिससे उसे सस्पेंड कर दिया जाए। रेंजर चूकि अनुसूचित जाति से है, इसलिए सामाज तक बात पहुंच गई थी। कुछ लोग सलाह देने लगे थाने में जाकर शिकायत कर दो। इससे मामला और बिगड़ जाता। मंत्री की मुश्किलें भी बढ़ जाती।









