बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यमुना नदी में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से एक परिवार मौत के मुंह में समाते-समाते बचा। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद ग्रामीणों की तत्परता और अदम्य साहस ने चार लोगों की जान बचा ली। यह घटना खादर क्षेत्र में यमुना नदी में किए जा रहे अवैध खनन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
बदरखा गांव निवासी किसान गुफरान शुक्रवार की सुबह अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर यमुना नदी के दूसरी ओर अपनी तरबूज की फसल देखने जा रहे थे। ट्रैक्टर पर गुफरान के साथ उनके दो मासूम बेटे—अयान और ज़ैद, और उनकी भाभी अंजुम भी सवार थीं। अभी वे नदी के बीच में ही थे कि अचानक ट्रैक्टर का पहिया एक गहरे गड्ढे में जा धंसा। गड्ढा इतना गहरा और खतरनाक था कि ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ गया और वह पलटकर पानी में समा गया।
मौत को मात: ग्रामीणों का ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’
ट्रैक्टर के पलटते ही चीख-पुकार मच गई। पानी का बहाव और गड्ढे की गहराई के कारण परिवार के सदस्य डूबने लगे। आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों ने जब मदद के लिए चीखें सुनीं, तो वे बिना समय गंवाए यमुना में कूद पड़े। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर पानी के भीतर उतरे और एक-एक करके गुफरान, उनके दोनों बच्चों और उनकी भाभी को सकुशल बाहर निकाला।
अवैध खनन बना ‘मौत का जाल’
स्थानीय ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए अवैध खनन को जिम्मेदार ठहराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यमुना के खादर क्षेत्र में रेत माफियाओं द्वारा पोर्कलेन मशीनों से अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे नदी के तल में कई गहरे और खतरनाक गड्ढे बन गए हैं। प्रशासन को बार-बार शिकायतें देने के बावजूद, इन गड्ढों को न तो भरा गया और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
हादसे की सूचना मिलने पर छपरौली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने बताया कि बदरखा गांव में ट्रैक्टर पलटने की घटना की जानकारी मिली है। पूरे मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि वहां अवैध खनन के कारण बने गड्ढे कितने खतरनाक हैं, ताकि सुरक्षा के लिहाज से उचित कदम उठाए जा सकें।









