Friday, September 4, 2026

महिला उत्पीड़न मामले में निलंबित IPS रतनलाल डांगी पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस विभाग से एक सप्ताह में मांगा जवाब

बिलासपुर। निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला उत्पीड़न से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तय समय में जवाब नहीं आने पर ऑफिसर-इन-चार्ज को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

 

योगा टीचर ने लगाए गंभीर आरोप

 

याचिका के मुताबिक, शिकायतकर्ता एक योगा टीचर हैं। उनका आरोप है कि तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (IG) रतनलाल डांगी ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे योग सीखना शुरू किया। आरोप है कि बाद में उन्होंने महिला के व्हाट्सऐप नंबर पर कथित तौर पर अश्लील संदेश भेजने शुरू कर दिए।

 

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि वीडियो कॉल के दौरान डांगी कथित रूप से अश्लील व्यवहार करते थे। विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी गईं। महिला का आरोप है कि उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने तथा उनके पति के खिलाफ झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराने की धमकी भी दी गई।

 

DGP के सामने दर्ज कराई थी शिकायत

 

महिला ने इस संबंध में 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए आईपीएस अधिकारी आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किए जाने की बात याचिका में कही गई है।

 

इसके बाद शिकायतकर्ता ने 20 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार के गृह विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के सचिव के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए महिला ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।

 

जांच प्रक्रिया पर भी सवाल

 

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि शिकायत की जांच ऐसे अधिकारियों से कराई जा रही है, जिनकी भूमिका को लेकर शिकायतकर्ता ने पहले ही आपत्ति दर्ज कराई है। याचिकाकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी मामले में आरोपी अधिकारी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

 

याचिका में यह भी कहा गया है कि IG आनंद छाबड़ा के खिलाफ महादेव सट्टा एप से जुड़े मामले में आपराधिक प्रकरण विचाराधीन है। ऐसे में उन्हें इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपना निष्पक्ष जांच और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। हालांकि, ये सभी आरोप याचिका में लगाए गए हैं और इन पर संबंधित पक्षों का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।

 

कथित संपत्तियों की जांच की भी मांग

 

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में रतनलाल डांगी से संबंधित कथित अवैध चल-अचल संपत्तियों की जांच और वैधानिक कार्रवाई की मांग भी की थी। शिकायत में छत्तीसगढ़ के रायपुर, धरमपुरा, राजिम, कटघोरा और बिलासपुर समेत राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर कथित संपत्तियों का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है।

 

याचिकाकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारियों ने इन संपत्तियों से संबंधित शिकायत की उचित जांच नहीं की।

 

फिलहाल हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में मामले की जांच और पुलिस विभाग की कार्रवाई को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।