कोरबा। कोरबा में एसईसीएल की मानिकपुर खदान के विस्तार को लेकर पर्यावरण जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल शामिल हुए। इस दौरान ग्रामीणों ने खदान विस्तार से पहले लंबित मामलों के निराकरण, मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी मांगें प्रशासन के सामने रखीं।
लंबित मुआवजा और पुनर्वास मामलों को निपटाने की मांग
जनसुनवाई में ग्रामीणों ने कहा कि पुराने लंबित मामलों का समाधान किए बिना खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने भी भू-विस्थापितों के मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाने की मांग रखी।
उन्होंने स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की बात भी कही। ग्रामीणों का कहना था कि खनन परियोजना के विस्तार का असर स्थानीय आबादी पर पड़ता है, इसलिए प्रभावित परिवारों के अधिकारों और रोजगार के मुद्दे पर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।
प्रदूषण और कोयला परिवहन को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी
जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने खदान क्षेत्र में धूल और वायु प्रदूषण का मुद्दा उठाया। उनका आरोप था कि कोयला परिवहन करने वाले कई वाहन बिना त्रिपाल के चलते हैं, जिससे सड़कों और आसपास के इलाकों में धूल फैलती है।
ग्रामीणों ने मांग की कि कोयला परिवहन करने वाले सभी वाहनों को अनिवार्य रूप से त्रिपाल से ढका जाए। इसके साथ ही धूल और वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण की जांच की मांग
जनसुनवाई में वक्ताओं ने खदान विस्तार से पहले क्षेत्र में वायु, जल, ध्वनि और धूल प्रदूषण की वैज्ञानिक एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी रखी, ताकि पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
मजदूरों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग
ग्रामीणों ने खदान में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इसके अलावा खनन क्षेत्र और आसपास के इलाकों में बेहतर अस्पताल एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई। ग्रामीणों ने स्थानीय शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने की बात भी रखी।
जनसुनवाई में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि भू-विस्थापितों के अधिकार, मजदूरों की सुरक्षा, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाए जाने के बाद ही खदान विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।










