रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। उनकी पत्नी पूजा बंजारे ने पति और ससुराल पक्ष के लोगों पर मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और करोड़ों रुपये दहेज मांगने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शादी के दूसरे दिन से प्रताड़ित करने का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, आरंग के ग्राम भानसोज निवासी पूजा बंजारे का विवाह जुलाई 2024 में धमतरी के जोधापुर वार्ड निवासी मनोज बंजारे के साथ हुआ था। मनोज बंजारे राज्य प्रशासनिक सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
पूजा बंजारे का आरोप है कि शादी के दौरान उनके मायके पक्ष ने घरेलू सामान, सोने की चेन और अन्य उपहार दिए थे। इसके बावजूद विवाह के दूसरे दिन से ही कम दहेज लाने को लेकर उन्हें ताने दिए जाने लगे। पीड़िता के मुताबिक, समय के साथ ससुराल पक्ष की ओर से कथित प्रताड़ना बढ़ती गई।
लग्जरी कार और 2 से 3 करोड़ रुपये मांगने का आरोप
शिकायत में पूजा बंजारे ने आरोप लगाया है कि उनके पति मनोज बंजारे, सास ललिता बंजारे और ससुर कोमल सिंह बंजारे लग्जरी कार और 2 से 3 करोड़ रुपये नकद लाने का दबाव बना रहे थे।
पीड़िता के अनुसार, 4 जनवरी 2025 को पति ने उन पर मायके की जमीन बेचकर रकम लाने का दबाव बनाया। आरोप है कि मांग पूरी करने से इनकार करने पर उनके साथ मारपीट की गई।
गर्भावस्था और प्रसव के बाद भी प्रताड़ना का आरोप
पूजा बंजारे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली। उनका कहना है कि बच्चे के जन्म के बाद पति ने उन्हें मायके में ही छोड़ दिया।
शिकायत के मुताबिक, 2 सितंबर 2026 को पति और ससुराल पक्ष के लोगों ने ग्राम भानसोज स्थित उनके मायके में भी मारपीट की। इसके बाद मामला महिला थाने तक पहुंचा।
काउंसलिंग से नहीं निकला समाधान, पुलिस ने शुरू की जांच
मामले में महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों के बीच काउंसलिंग कराई गई। हालांकि, सुलह की कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद पुलिस ने डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे और उनके परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना से संबंधित मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
फिलहाल मामले में पुलिस जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान होने वाले तथ्यों के आधार पर होगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। उनकी पत्नी पूजा बंजारे ने पति और ससुराल पक्ष के लोगों पर मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और करोड़ों रुपये दहेज मांगने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शादी के दूसरे दिन से प्रताड़ित करने का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, आरंग के ग्राम भानसोज निवासी पूजा बंजारे का विवाह जुलाई 2024 में धमतरी के जोधापुर वार्ड निवासी मनोज बंजारे के साथ हुआ था। मनोज बंजारे राज्य प्रशासनिक सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
पूजा बंजारे का आरोप है कि शादी के दौरान उनके मायके पक्ष ने घरेलू सामान, सोने की चेन और अन्य उपहार दिए थे। इसके बावजूद विवाह के दूसरे दिन से ही कम दहेज लाने को लेकर उन्हें ताने दिए जाने लगे। पीड़िता के मुताबिक, समय के साथ ससुराल पक्ष की ओर से कथित प्रताड़ना बढ़ती गई।
लग्जरी कार और 2 से 3 करोड़ रुपये मांगने का आरोप
शिकायत में पूजा बंजारे ने आरोप लगाया है कि उनके पति मनोज बंजारे, सास ललिता बंजारे और ससुर कोमल सिंह बंजारे लग्जरी कार और 2 से 3 करोड़ रुपये नकद लाने का दबाव बना रहे थे।
पीड़िता के अनुसार, 4 जनवरी 2025 को पति ने उन पर मायके की जमीन बेचकर रकम लाने का दबाव बनाया। आरोप है कि मांग पूरी करने से इनकार करने पर उनके साथ मारपीट की गई।
गर्भावस्था और प्रसव के बाद भी प्रताड़ना का आरोप
पूजा बंजारे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली। उनका कहना है कि बच्चे के जन्म के बाद पति ने उन्हें मायके में ही छोड़ दिया।
शिकायत के मुताबिक, 2 सितंबर 2026 को पति और ससुराल पक्ष के लोगों ने ग्राम भानसोज स्थित उनके मायके में भी मारपीट की। इसके बाद मामला महिला थाने तक पहुंचा।
काउंसलिंग से नहीं निकला समाधान, पुलिस ने शुरू की जांच
मामले में महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों के बीच काउंसलिंग कराई गई। हालांकि, सुलह की कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद पुलिस ने डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे और उनके परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना से संबंधित मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
फिलहाल मामले में पुलिस जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान होने वाले तथ्यों के आधार पर होगी।








