Saturday, October 24, 2026

Chhattisgarh News: नशे के कारोबार पर लगेगी लगाम! PHQ में बनेगी ANTF की अलग विंग, 25 सदस्यीय टीम की तैयारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए पुलिस एक नई रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत पुलिस मुख्यालय (PHQ) स्तर पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की अलग विंग गठित करने की तैयारी है। प्रस्तावित इकाई का नेतृत्व डीजी या एडीजी रैंक के अधिकारी कर सकते हैं। सीआईडी और साइबर पुलिस की तर्ज पर इसका स्वतंत्र सेटअप तैयार करने की योजना है, ताकि प्रदेशभर में फैले नशे के नेटवर्क के खिलाफ समन्वित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

25 सदस्यीय टीम गठित करने की तैयारी

प्रस्तावित एएनटीएफ में आईजी, डीआईजी, एसपी, एएसपी, डीएसपी, टीआई सहित अन्य पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद शुरुआती चरण में अधिकारियों और कर्मचारियों को अस्थायी तौर पर तैनात किया जा सकता है। इसके बाद नियमित भर्ती की प्रक्रिया अपनाने की योजना है।

पहले चरण में करीब 25 सदस्यों की टीम गठित करने की तैयारी है। इस इकाई का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री और उनकी सप्लाई चेन पर प्रभावी कार्रवाई करना होगा। अलग विंग बनने से तस्करों की पहचान करने, उनके नेटवर्क का पता लगाने और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

तस्करों के साथ सप्लाई चेन पर भी होगी कार्रवाई

पुलिस की रणनीति केवल नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों तक सीमित नहीं रहेगी। इसके तहत नशीले पदार्थों की खेती करने वालों से लेकर सप्लाई चेन की अंतिम कड़ी तक पहुंचने पर जोर दिया जाएगा।

इसके अलावा, कानून के प्रावधानों के तहत आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करने और नीलामी जैसी कार्रवाई भी की जा सकेगी। उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क को कमजोर करना और उसके आर्थिक आधार पर चोट पहुंचाना है।

पुलिस मुख्यालय से होगी प्रदेशभर में निगरानी

फिलहाल छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में एएनटीएफ की इकाइयां काम कर रही हैं। ये संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के अधीन संचालित होती हैं। अब पुलिस मुख्यालय स्तर पर अलग सेटअप तैयार होने से प्रदेशभर में नशे के नेटवर्क की निगरानी और कार्रवाई के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था बनाने की योजना है।

प्रस्तावित विंग स्थानीय पुलिस के साथ आबकारी विभाग, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से काम करेगी। इसके जरिए तस्करी के रास्तों, सप्लाई चेन और संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया जाएगा।

एडीजी अमित कुमार को सौंपी गई जिम्मेदारी

जानकारी के अनुसार, शासन ने पिछले महीने खुफिया प्रमुख अमित कुमार को एएनटीएफ की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनके साथ डीआईजी पारुल माथुर और आईपीएस आकाश शुक्ला को भी इस काम की जिम्मेदारी दी गई है।

अब टीम के निचले स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में एएसपी, डीएसपी, टीआई, एसआई, एएसआई और सिपाहियों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम संरचना और नियुक्तियों की प्रक्रिया शासन की मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगी।

2029 तक नशे के नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ में सूखे नशे के अवैध कारोबार और तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के लिए वर्ष 2029 तक का लक्ष्य निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस आने वाले दिनों में तस्करी, अवैध बिक्री और सप्लाई चेन के खिलाफ अभियान तेज करने की तैयारी में है।

नशीले पदार्थों के संगठित कारोबार को नारकोटिक्स टेररिज्म के नजरिये से भी देखा जा रहा है। रणनीति का उद्देश्य तस्करी नेटवर्क को तोड़ना और छत्तीसगढ़ को नशीले पदार्थों की सप्लाई के कॉरिडोर के रूप में इस्तेमाल होने से रोकना है।

पुलिस मुख्यालय में एएनटीएफ की अलग विंग बनने से इन प्रयासों को एक केंद्रीकृत दिशा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, प्रस्तावित इकाई के गठन और नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय शासन की मंजूरी के बाद ही होगा।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए पुलिस एक नई रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत पुलिस मुख्यालय (PHQ) स्तर पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की अलग विंग गठित करने की तैयारी है। प्रस्तावित इकाई का नेतृत्व डीजी या एडीजी रैंक के अधिकारी कर सकते हैं। सीआईडी और साइबर पुलिस की तर्ज पर इसका स्वतंत्र सेटअप तैयार करने की योजना है, ताकि प्रदेशभर में फैले नशे के नेटवर्क के खिलाफ समन्वित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

25 सदस्यीय टीम गठित करने की तैयारी

प्रस्तावित एएनटीएफ में आईजी, डीआईजी, एसपी, एएसपी, डीएसपी, टीआई सहित अन्य पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद शुरुआती चरण में अधिकारियों और कर्मचारियों को अस्थायी तौर पर तैनात किया जा सकता है। इसके बाद नियमित भर्ती की प्रक्रिया अपनाने की योजना है।

पहले चरण में करीब 25 सदस्यों की टीम गठित करने की तैयारी है। इस इकाई का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री और उनकी सप्लाई चेन पर प्रभावी कार्रवाई करना होगा। अलग विंग बनने से तस्करों की पहचान करने, उनके नेटवर्क का पता लगाने और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

तस्करों के साथ सप्लाई चेन पर भी होगी कार्रवाई

पुलिस की रणनीति केवल नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों तक सीमित नहीं रहेगी। इसके तहत नशीले पदार्थों की खेती करने वालों से लेकर सप्लाई चेन की अंतिम कड़ी तक पहुंचने पर जोर दिया जाएगा।

इसके अलावा, कानून के प्रावधानों के तहत आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करने और नीलामी जैसी कार्रवाई भी की जा सकेगी। उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क को कमजोर करना और उसके आर्थिक आधार पर चोट पहुंचाना है।

पुलिस मुख्यालय से होगी प्रदेशभर में निगरानी

फिलहाल छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में एएनटीएफ की इकाइयां काम कर रही हैं। ये संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के अधीन संचालित होती हैं। अब पुलिस मुख्यालय स्तर पर अलग सेटअप तैयार होने से प्रदेशभर में नशे के नेटवर्क की निगरानी और कार्रवाई के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था बनाने की योजना है।

प्रस्तावित विंग स्थानीय पुलिस के साथ आबकारी विभाग, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से काम करेगी। इसके जरिए तस्करी के रास्तों, सप्लाई चेन और संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया जाएगा।

एडीजी अमित कुमार को सौंपी गई जिम्मेदारी

जानकारी के अनुसार, शासन ने पिछले महीने खुफिया प्रमुख अमित कुमार को एएनटीएफ की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनके साथ डीआईजी पारुल माथुर और आईपीएस आकाश शुक्ला को भी इस काम की जिम्मेदारी दी गई है।

अब टीम के निचले स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में एएसपी, डीएसपी, टीआई, एसआई, एएसआई और सिपाहियों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम संरचना और नियुक्तियों की प्रक्रिया शासन की मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगी।

2029 तक नशे के नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ में सूखे नशे के अवैध कारोबार और तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के लिए वर्ष 2029 तक का लक्ष्य निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस आने वाले दिनों में तस्करी, अवैध बिक्री और सप्लाई चेन के खिलाफ अभियान तेज करने की तैयारी में है।

नशीले पदार्थों के संगठित कारोबार को नारकोटिक्स टेररिज्म के नजरिये से भी देखा जा रहा है। रणनीति का उद्देश्य तस्करी नेटवर्क को तोड़ना और छत्तीसगढ़ को नशीले पदार्थों की सप्लाई के कॉरिडोर के रूप में इस्तेमाल होने से रोकना है।

पुलिस मुख्यालय में एएनटीएफ की अलग विंग बनने से इन प्रयासों को एक केंद्रीकृत दिशा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, प्रस्तावित इकाई के गठन और नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय शासन की मंजूरी के बाद ही होगा।