कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) की राशि में घोटाले का एक और मामला सामने आया है, जिसमें पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के साथ-साथ वर्तमान भाजपा शासनकाल के दौरान भी भ्रष्टाचार की जांच की जा रही है। ताजा मामला कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक से जुड़ा हुआ है, जहां तत्कालीन एसडीओ RES आरके गुप्ता पर शासकीय राशि में चपत लगाने का गंभीर आरोप लगा है।
7 से 8 लाख का गबन करने की कोशिश
यह घोटाला तब सामने आया जब एसडीओ आरके गुप्ता द्वारा किए गए निर्माण कार्यों की अंतिम किश्त के भुगतान के लिए प्रस्ताव भेजा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र में सीसी रोड निर्माण कार्यों के लिए जो भुगतान प्रस्ताव भेजा गया, उसमें दुर्गम क्षेत्र के लिए निर्धारित परिवहन व्यय को सामान्य क्षेत्र में भी जोड़ा गया था, जिससे 7 से 8 लाख रुपए से अधिक की राशि का गबन करने की कोशिश की गई। खास बात यह है कि पोड़ी उपरोड़ा को दुर्गम क्षेत्र के रूप में नहीं माना जाता, फिर भी परिवहन व्यय शामिल किया गया।
एसडीओ को नोटिस, स्पष्टीकरण की मांग
जब यह मामला पकड़ में आया तो जिला खनिज संस्थान न्यास ने एसडीओ आरके गुप्ता को स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया। उन्हें कहा गया है कि वह 2 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। अन्यथा, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह मामला तब और गंभीर हो गया, जब पता चला कि आरके गुप्ता के हस्ताक्षर से सारी प्रक्रियाएं और मेजरमेंट बुक तैयार की गई थीं।
कोरबा में घपले का ‘सेफ जोन’
विभागीय सूत्रों के अनुसार, आरके गुप्ता का नाम पहले भी विवादों में रहा है। कोरबा को उनके लिए ‘सेफ जोन’ साबित हो रहा है, जहां वे अपने भ्रष्टाचार की गतिविधियों को अंजाम देने में सफल रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे अब फिर से कोरबा में अपनी पदस्थापना करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पहले भी उनके खिलाफ महासमुंद में आबकारी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया जा चुका है, और विभागीय जांच भी चल रही है। इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति भी दी गई, जो कई सवाल खड़े कर रही है।
सख्त जांच की आवश्यकता
इस पूरे मामले में अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या समय रहते एसडीओ आरके गुप्ता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि उनके भ्रष्टाचार की पूरी जांच हो सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि सार्वजनिक धन का सही तरीके से उपयोग हो। विभागीय अधिकारियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर इस मामले की जांच में ढिलाई बरती गई तो कोरबा जिले में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है।
जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर अब दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे इस मामले में पारदर्शिता से काम करें और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों को रोका जा सके।