कोरबा, 2 अगस्त। प्रदेश में बढ़ी हुई बिजली दरों, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया और बिजली बिल में राहत को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को जिला कांग्रेस कार्यालय, टीपी नगर में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सरकार से बिजली दरों में हालिया बढ़ोतरी वापस लेने, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तत्काल रोकने और कांग्रेस शासनकाल में लागू 400 यूनिट तक आधे बिजली बिल की योजना को फिर से शुरू करने की मांग की।
प्रेस वार्ता में रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया, सपना चौहान, नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बिजली दरों में बढ़ोतरी पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल है। इसके बावजूद प्रदेश की जनता को महंगी बिजली का बोझ उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली दरों में लगातार बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया से गरीब, मध्यमवर्गीय परिवारों, किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
स्मार्ट मीटर को लेकर उठाए सवाल
पूर्व मंत्री ने दावा किया कि प्रदेश के कई हिस्सों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद उपभोक्ताओं की ओर से बिजली बिल में अप्रत्याशित वृद्धि की शिकायतें सामने आ रही हैं।
कांग्रेस ने मांग की कि स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली की जांच किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से कराई जाए। पार्टी का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने तक नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।
इसके साथ ही बिजली बिल की गणना व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए जिला स्तर पर स्वतंत्र शिकायत प्रकोष्ठ बनाने की मांग भी कांग्रेस ने की है।
400 यूनिट तक आधे बिजली बिल की योजना फिर लागू करने की मांग
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय लागू 400 यूनिट तक आधे बिजली बिल की योजना से प्रदेश के लाखों परिवारों को राहत मिली थी।
उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार ने इस राहत को घटाकर 100 यूनिट तक सीमित कर दिया है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
कांग्रेस ने मांग की है कि 400 यूनिट तक आधे बिजली बिल की पुरानी व्यवस्था को दोबारा लागू किया जाए, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।











